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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul Boy Karate Gold Medal : बिहार के सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव रामनगर के सात साल के बालक गीतांक आयुष ने खेल जगत में अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अजय कुमार के प्रतिभावान पुत्र गीतांक आयुष ने नेशनल लेवल जूनियर कराटे चैंपियनशिप-2026 में अपने हुनर का जलवा बिखेरते हुए अंडर-25 किलोग्राम भार वर्ग (Weight Category) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम कर इतिहास रच दिया है। इतनी छोटी सी उम्र में राष्ट्रीय पटल पर स्वर्ण पदक जीतना पूरे इलाके के लिए बड़े गौरव की बात है।

Supaul Boy Karate Gold Medal गांव लौटने पर हुआ ऐतिहासिक स्वागत, फूल-मालाओं से लादा गया नन्हा खिलाड़ी

राष्ट्रीय स्तर पर देश-प्रदेश का नाम चमकाकर जब नन्हा कराटे चैंपियन गीतांक आयुष अपने पैतृक गांव रामनगर पहुंचा, तो वहां उत्सव जैसा माहौल देखा गया। ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने मिलकर इस नन्हे खिलाड़ी का भव्य और जोरदार नागरिक अभिनंदन किया।

गांव के चौक-चौराहों पर आयुष को फूल-मालाएं पहनाई गईं और मिठाइयां बांटी गईं। इस दौरान ग्रामीणों ने एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन कर नन्हे विजेता की हौसलाअफजाई की और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगलकामनाएं कीं।

Supaul Boy Karate Gold Medal छोटे से गांव से निकला राष्ट्रीय स्तर का सितारा, ग्रामीणों में भारी उत्साह

सम्मान समारोह के दौरान पूरा रामनगर गांव अपने लाडले की इस ऐतिहासिक जीत से प्रफुल्लित नजर आया। बधाई देने के लिए आसपास के गांवों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे।

स्थानीय बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि गीतांक आयुष ने इतनी कम उम्र में जो मुकाम हासिल किया है, उसने न केवल सुपौल जिले को बल्कि पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है। आयुष की इस अप्रत्याशित सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभाएं किसी बड़े शहर या आधुनिक सुविधाओं की मोहताज नहीं होतीं; यदि लगन और जज्बा हो तो सुदूर ग्रामीण अंचलों से भी विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।

Supaul Boy Karate Gold Medal बचपन से ही था मार्शल आर्ट का शौक, अन्य बच्चों के लिए बना प्रेरणास्रोत

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि गीतांक आयुष को बचपन से ही खेलकूद और विशेष रूप से मार्शल आर्ट्स (कराटे) में गहरी रुचि थी। उसकी इस सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत, अनुशासित जीवन और नियमित अभ्यास का सबसे बड़ा योगदान है।

आयुष की इस स्वर्णिम सफलता को देखकर अब गांव के अन्य छोटे बच्चों और अभिभावकों में भी खेलों के प्रति एक नया उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों को पूरी उम्मीद है कि आयुष भविष्य में भी अपनी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराएगा।

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