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रिपोर्टर: गनेश सिंह

Uttarakhand border Nihang Sikhs tension : हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित विकासनगर के कुल्हाल चेकपोस्ट पर गुरुवार (25 जून, 2026) रात उस समय भारी तनाव फैल गया, जब निहंग सिखों का एक बड़ा समूह पुलिस से उलझ गया। सुरक्षा के लिए लगाए गए बहुस्तरीय धातु के बैरिकेड्स को तोड़ते हुए यह समूह उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गया और प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की ओर बढ़ गया। यह पूरा विवाद कर्णप्रयाग और नागरासू गुरुद्वारों में हाल ही में स्थानीय लोगों के साथ हुए टकराव से जुड़ा हुआ है।

Uttarakhand border Nihang Sikhs tension सुरक्षा घेरा नाकाम, सीमा पर पुलिस से आमना-सामना

मोहाली के गुरुद्वारा सिंह शहीदां से रवाना हुआ निहंग संगठनों का यह ‘जत्था’ जब कुल्हाल सीमा पर पहुंचा, तो वहां स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। निहंगों के मार्च की पूर्व सूचना मिलने के कारण उत्तराखंड प्रशासन ने सीमावर्ती इलाके को छावनी में बदल दिया था। दंगा नियंत्रण गियर से लैस पुलिस बल वहां तैनात था, लेकिन पारंपरिक नीली पोशाक पहने और तलवारों व अन्य हथियारों से लैस दर्जनों निहंगों ने बल प्रयोग कर बैरिकेड्स को हटा दिया और आगे बढ़ गए। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक पंकज गैरोला ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने सुरक्षा घेरा तोड़ा है और पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रही है।

Uttarakhand border Nihang Sikhs tension बातचीत का दौर विफल, चार साथियों की रिहाई पर अड़े प्रदर्शनकारी

मामले को शांत करने के लिए स्थानीय एसडीएम और तहसीलदार समेत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। निहंग समूह के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का लंबा दौर चला, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक कर्णप्रयाग घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए उनके चार साथियों को रिहा नहीं किया जाता, वे पंजाब वापस नहीं लौटेंगे। वे अपने साथियों की रिहाई तक उत्तराखंड में ही डटे रहने की जिद पर अड़े हैं।

Uttarakhand border Nihang Sikhs tension क्या है पूरा विवाद? शांतिपूर्ण समझौते की अपील

इस गतिरोध की जड़ें 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक घटना से जुड़ी हैं, जहां स्थानीय निवासियों और निहंगों के एक अन्य समूह के बीच मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। उस संघर्ष में कुछ स्थानीय लोग और एक निहंग सिख घायल हो गए थे, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार निहंगों को गिरफ्तार किया था। सिख समुदाय के एक वर्ग का आरोप है कि प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की है। हालांकि, वर्तमान मार्च का नेतृत्व कर रहे एक प्रतिनिधि ने कहा कि उनका मकसद टकराव नहीं है, बल्कि वे शांतिपूर्वक प्रार्थना करते हुए अपनी यात्रा पूरी करना चाहते हैं और स्थानीय लोगों के साथ समझौते के जरिए इस विवाद को सुलझाने के इच्छुक हैं।

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