रिपोर्टर: शुभ तिवारी
Passport Not Proof of Indian Citizenship : क्या भारतीय पासपोर्ट इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि आप भारत के नागरिक हैं? भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के हालिया बयान ने इस विषय पर देशव्यापी बहस छेड़ दी है। ‘पासपोर्ट सेवा दिवस’ के मौके पर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज (Travel Document) है, इसे नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता।


इस बयान के सामने आते ही विपक्षी नेताओं, बुद्धिजीवियों और आम जनता के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है कि अगर कड़े पुलिस वेरिफिकेशन के बाद बनने वाला पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर देश में नागरिकता का असली कानूनी दस्तावेज कौन सा है?
Passport Not Proof of Indian Citizenship विपक्ष और मशहूर हस्तियों ने उठाए सवाल, जावेद अख्तर ने बताया ‘बेतुका’
विदेश मंत्रालय के इस रुख पर सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है:
- जावेद अख्तर (गीतकार): उन्होंने इस तर्क को पूरी तरह ‘बेतुका’ करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार व्यापक जांच और पुलिस सत्यापन के बाद पासपोर्ट जारी करती है, तो क्या वह खुद आश्वस्त नहीं है कि धारक भारतीय है?
- आदित्य ठाकरे (शिवसेना UBT): उन्होंने चिंता जताई कि अगर भारत सरकार यह कहती है कि पासपोर्ट गैर-नागरिकों को भी जारी हो सकता है, तो इससे विदेशी आव्रजन (Immigration) के सामने भारतीय पासपोर्ट की साख और विश्वसनीयता कमजोर होगी।
- कपिल सिब्बल (वरिष्ठ अधिवक्ता व नेता): उन्होंने सरकार से सीधा सवाल पूछा कि यदि पासपोर्ट नहीं, तो फिर आम आदमी के लिए नागरिकता का असली पैमाना क्या है?
Passport Not Proof of Indian Citizenship बॉम्बे हाई कोर्ट का 13 साल पुराना फैसला और ‘पासपोर्ट एक्ट 1967’
इस पूरे विवाद के बीच कानूनी विशेषज्ञों और सरकारी सूत्रों ने ‘पासपोर्ट अधिनियम, 1967’ और बॉम्बे उच्च न्यायालय के साल 2013 के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है।
अदालत का रुख: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि तकनीकी और कानूनी रूप से ‘पासपोर्ट एक्ट’ के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट जारी किए जा सकते हैं। इसलिए, केवल पासपोर्ट का होना नागरिकता का ‘निर्णायक’ या ‘अंतिम’ प्रमाण नहीं माना जा सकता।
पूर्व राजनयिक निरुपमा मेनन राव के अनुसार, पासपोर्ट और नागरिकता में बड़ा अंतर है। पासपोर्ट हमेशा ‘भारत सरकार की संपत्ति’ होता है जिसे कभी भी जब्त या रद्द किया जा सकता है, जबकि किसी व्यक्ति की नागरिकता को इतनी आसानी से नहीं छीना जा सकता। पासपोर्ट का प्राथमिक उद्देश्य केवल विदेश यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति की पहचान को प्रमाणित करना और उसके अधिकारों की रक्षा करना है।
Passport Not Proof of Indian Citizenship तो फिर भारतीय नागरिकता का असली और कानूनी प्रमाण क्या है?
नागरिकता का निर्धारण केवल ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ (Citizenship Act, 1955) के तहत होता है। इसके अनुसार, भारत में नागरिकता प्रमाणित करने वाले सबसे पुख्ता दस्तावेज निम्नलिखित हैं:
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate): जन्म या वंश के आधार पर देश में रह रहे अधिकांश भारतीयों के लिए यह सबसे ठोस आधार है।
- नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate): यह प्रमाण पत्र विशेष रूप से उन लोगों को जारी किया जाता है जो पंजीकरण (Registration) या प्राकृतिककरण (Naturalisation) की कानूनी प्रक्रिया के जरिए भारतीय नागरिक बनते हैं। आम तौर पर जन्म से भारतीय नागरिकों को अलग से कोई नागरिकता सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता है।

