BhindBhind
Spread the love

रिपोर्टर: ईशु प्रसाद

Bhind : मध्य प्रदेश के भिंड जिला मलेरिया विभाग में एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहाँ अनुसूचित जनजाति (ST) के कोटे का गलत इस्तेमाल कर सामान्य वर्ग (General Category) के कुछ कर्मचारियों द्वारा पिछले लगभग तीन दशकों से मलेरिया इंस्पेक्टर (मलेरिया निरीक्षक) के पद पर नौकरी करने और सरकारी खजाने को चूना लगाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इन कर्मचारियों ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर और अपने सरनेम (उपनाम) बदलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

Bhind सरनेम बदलकर बने ‘सहरिया’ और ‘कुमार’, 1998-99 में हुई थी नियुक्ति

जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1998 और 1999 में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत मलेरिया इंस्पेक्टर के पद पर तीन कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। इन कर्मचारियों ने अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित पदों का लाभ उठाने के लिए अपने असली सरनेम छिपा लिए। किसी ने अपने नाम के आगे सिर्फ ‘कुमार’ लगा लिया तो कोई मध्य प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजाति ‘सहरिया’ का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर ‘सहरिया’ बन बैठा। पिछले 30 सालों से यह कर्मचारी शासन की आंखों में धूल झोंककर लगातार वेतन प्राप्त कर रहे हैं।

Bhind रौन, मेहगांव और गोहद में पदस्थ निरीक्षकों के नामों का खुलासा

फर्जीवाड़े के शिकार इस मामले में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों के नाम और उनकी वर्तमान पदस्थापना की सूची भी सामने आई है:

  • महेंद्र सिंह भदौरिया (रौन में पदस्थ): सामान्य वर्ग के इस मलेरिया निरीक्षक ने सरकारी दस्तावेजों में अपना नाम बदलकर केवल ‘महेंद्र कुमार’ दर्ज करवाया और एसटी कोटे से नौकरी हथिया ली।
  • राकेश सहरिया (मेहगांव में पदस्थ): सूत्रों के मुताबिक, सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखने वाले यह कर्मचारी मेहगांव में ‘राकेश सहरिया’ के नाम से अनुसूचित जनजाति कोटे पर कार्यरत हैं।
  • श्रीकृष्ण सिकरवार (गोहद में पदस्थ): इनका वास्तविक उपनाम सिकरवार है, लेकिन गोहद में यह ‘श्रीकृष्ण सहरिया’ के नाम से पदस्थ हैं और सालों से सेवा दे रहे हैं।

Bhind रिटायरमेंट के बचे हैं महज 4-5 साल, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

इस पूरे फर्जीवाड़े की सबसे खास बात यह है कि इन तीनों विवादित कर्मचारियों की शासकीय सेवा के अब मात्र 4 से 5 वर्ष ही शेष रह गए हैं। यानी ये अपनी पूरी नौकरी अवैध तरीके से पूरी करने के कगार पर हैं। मामला उजागर होने के बाद अब भिंड जिले के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषियों की सेवाएं तत्काल समाप्त करने और पिछले 30 वर्षों में उनके द्वारा उठाए गए वेतन की रिकवरी करने की मांग की है।

ये भी पढ़े: Supaul में युवा कांग्रेस का हल्लाबोल: महंगाई और पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन, पीएम और सीएम का फूंका पुतला