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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी अब ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को मंत्रिमंडल में उतारने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी राज्य में एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री का फॉर्मूला लागू करेगी। इसमें आधी आबादी और दलित समुदाय को प्रतिनिधित्व देकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है।


आधी आबादी का सम्मान: महिला डिप्टी CM की रेस तेज

बंगाल चुनाव में इस बार महिलाओं ने भाजपा पर जबरदस्त भरोसा दिखाया है। पार्टी की 34 महिला उम्मीदवारों में से 23 ने जीत दर्ज की है। इसी का सम्मान करते हुए एक उपमुख्यमंत्री पद महिला को दिया जा सकता है। इस रेस में दो प्रमुख नाम सबसे आगे हैं:

  • रूपा गांगुली: अभिनेत्री से राजनेता बनीं रूपा गांगुली ने सोनारपुर साउथ से बड़ी जीत दर्ज की है। महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष होने के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ है।
  • अग्निमित्रा पॉल: आसनसोल दक्षिण से आक्रामक जीत दर्ज करने वाली अग्निमित्रा पार्टी का फायरब्रांड चेहरा मानी जाती हैं। उन्हें ममता बनर्जी के ‘महिला फैक्टर’ का सबसे प्रभावी काउंटर माना जा रहा है।

दलित और राजवंशी समाज को साधने की रणनीति

बंगाल की 68 आरक्षित सीटों में से 51 पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। ऐसे में दूसरे डिप्टी सीएम के लिए निसिथ प्रमाणिक का नाम सबसे प्रबल है। उत्तर बंगाल के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक राजवंशी समाज का बड़ा चेहरा हैं और अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं।

दिलीप घोष: अनुभव और संगठन का संतुलन

डिप्टी सीएम की चर्चाओं में बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। आरएसएस पृष्ठभूमि और संगठन चलाने का उनका लंबा अनुभव नई सरकार के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो सकता है।


एक नज़र में समीकरण

पदसंभावित दावेदारमुख्य आधार
मुख्यमंत्रीशुभेंदु अधिकारीममता को हराने वाले मुख्य रणनीतिकार
उपमुख्यमंत्री (महिला)रूपा गांगुली / अग्निमित्रा पॉलमहिला वोटर्स का प्रतिनिधित्व और लोकप्रियता
उपमुख्यमंत्री (दलित/ST)निसिथ प्रमाणिकउत्तर बंगाल और राजवंशी समाज में पकड़