रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Chirmiri : नगर पालिक निगम चिरमिरी में लंबे समय से लंबित जनसमस्याओं को लेकर स्थानीय निवासियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। पानी, बिजली और खस्ताहाल सड़कों जैसी मूलभूत जरूरतों के अभाव में जी रही जनता ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शहर की लगातार हो रही अनदेखी के विरोध में आगामी 7 मई को एक विशाल जन-आंदोलन और सत्याग्रह की घोषणा की गई है।
Chirmiri जनसुविधाओं की अनदेखी से गहराया आक्रोश
चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पेयजल की किल्लत, जर्जर सड़कें और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों जैसी समस्याओं पर नगर निगम प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने न केवल आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि क्षेत्र के विकास की गति को भी पूरी तरह रोक दिया है। प्रशासन की इसी कथित लापरवाही ने अब एक बड़े जनांदोलन की नींव रख दी है।
Chirmiri 7 मई को होगा ‘चिरमिरी न्याय सत्याग्रह’
जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष शिवांश जैन के नेतृत्व में ‘चिरमिरी न्याय सत्याग्रह’ की रूपरेखा तैयार की गई है। इस आंदोलन के तहत 7 मई को आम सभा, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसी रणनीतियां बनाई गई हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई चिरमिरी के स्वाभिमान और यहाँ के निवासियों के वाजिब हक की है। जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, विरोध का यह स्वर कम नहीं होगा।
Chirmiri 10 सूत्रीय मांगों पर आर-पार की लड़ाई
इस सत्याग्रह के केंद्र में 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जो सीधे तौर पर रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़ी हैं। जनप्रतिनिधियों का तर्क है कि चिरमिरी की जनता टैक्स देने के बावजूद नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को उसकी सोई हुई जिम्मेदारी का एहसास कराना और क्षेत्र में ठप पड़े विकास कार्यों को पुनः गति देना है। अब देखना यह होगा कि इस बड़े आंदोलन की आहट के बाद प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया रहती है।
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