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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Hamirpur : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। यहाँ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित चकबंदी विभाग में तैनात एक पेशकार को बांदा की भ्रष्टाचार निवारण इकाई (Anti-Corruption Team) ने रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

Hamirpur सेना के रिटायर्ड हवलदार से मांगी थी मोटी घूस

यह पूरा मामला एक पूर्व सैनिक के उत्पीड़न से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त आर्मी हवलदार धर्मवीर सिंह अपने खेत के नक्शे में हुई त्रुटि को ठीक कराने के लिए लंबे समय से चकबंदी विभाग की चौखट पर माथा टेक रहे थे। आरोप है कि चकबंदी पेशकार अल्ताफ ने इस सरकारी कार्य को करने के बदले पीड़ित से 1.5 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की थी। पीड़ित ने जब असमर्थता जताई, तो काफी मोलभाव के बाद आरोपी पेशकार 25 हजार रुपये लेने पर राजी हुआ।

Hamirpur बांदा टीम की घेराबंदी और रंगे हाथ गिरफ्तारी

भ्रष्टाचार से परेशान होकर पीड़ित धर्मवीर सिंह ने इसकी गोपनीय शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बांदा इकाई से की। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए टीम ने जाल बिछाया। गुरुवार को बांदा से आई 20 सदस्यीय टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी स्थिति मजबूत की। जैसे ही पीड़ित ने पेशकार अल्ताफ को रिश्वत की तयशुदा रकम 25 हजार रुपये थमाई, वैसे ही सादे कपड़ों में तैनात टीम ने उसे धर दबोचा। रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद जब आरोपी के हाथ धुलवाए गए, तो वे गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक साक्ष्य माना जाता है।

Hamirpur विधिक कार्रवाई और विभाग में दहशत का माहौल

गिरफ्तारी के तुरंत बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी को लेकर सदर कोतवाली पहुंची। यहाँ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी पेशकार के विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उसे जेल भेजने की तैयारी है। कलेक्ट्रेट जैसे अति-सुरक्षित और महत्वपूर्ण परिसर में हुई इस छापेमारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जमीन पर सक्रिय है। इस घटना के बाद से अन्य सरकारी दफ्तरों में भी खलबली मची हुई है।

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