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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Dabra : संपूर्ण भारत में गौ माता के संरक्षण और सम्मान के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की गूँज अब डबरा में भी तेज हो गई है। गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने के संकल्प के साथ स्थानीय युवाओं और गौ सेवकों ने मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में कल, क्षेत्र के सैकड़ों युवा और सामाजिक कार्यकर्ता महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपेंगे।

पिछले एक सप्ताह से डबरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गौ माता राष्ट्र माता’ अभियान के तहत निरंतर जनसंपर्क, हस्ताक्षर अभियान और रैलियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य समाज को गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

Dabra शुक्ला डेयरी से एसडीएम कार्यालय तक निकलेगी विशाल रैली

आपदा प्रबंधन समिति ‘साथी हाथ बढ़ाना’ संगठन के नेतृत्व में कल एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा। संगठन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह तोमर (चिंटू भैया) ने जानकारी देते हुए बताया कि यह रैली शुक्ला डेयरी से प्रारंभ होकर परशुराम चौराहा होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुँचेगी। यहाँ कार्यकर्ता राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपेंगे। युवाओं का यह समूह पिछले सात-आठ दिनों से पूरे क्षेत्र में भ्रमण कर लोगों को इस पावन उद्देश्य से जोड़ रहा है।

Dabra कत्लखानों से मुक्ति और संरक्षण का संकल्प

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ माता को हत्या और कत्लखानों के क्रूर चंगुल से बचाना है। युवाओं का मानना है कि जब तक गाय को कानूनी रूप से ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा नहीं मिलता, तब तक उनके संरक्षण के प्रयासों को वह मजबूती नहीं मिल पाएगी जिसकी आवश्यकता है। रैली के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे गौ सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और सड़कों पर लावारिस घूम रही गायों के लिए उचित प्रबंधन की मांग करें।

Dabra धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक

हिंदू धर्म की मान्यताओं का उल्लेख करते हुए गौ सेवकों ने कहा कि गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है, इसीलिए उसे ‘माता’ का स्थान दिया गया है। ‘साथी हाथ बढ़ाना’ संगठन और क्षेत्र के अन्य गौ भक्तों ने समाज के हर वर्ग से अपील की है कि कल होने वाले इस ज्ञापन कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन है, बल्कि बेजुबान पशुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा सामाजिक कदम भी है।

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