रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
AAP : भारतीय राजनीति में 24 अप्रैल 2026 की शाम एक बड़े भूचाल के रूप में दर्ज की गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने 6 अन्य साथियों के साथ पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने न केवल विपक्षी खेमे को चौंका दिया है, बल्कि राज्यसभा में ‘आप’ की ताकत को भी लगभग खत्म कर दिया है। राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे चेहरों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है।
AAP संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग: दो-तिहाई सांसदों का विलय
एक नाटकीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने घोषणा की कि वे अकेले नहीं, बल्कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के साथ भाजपा में विलय कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत यह विलय पूरी तरह से वैध है, जिससे उनकी सदस्यता पर कोई आंच नहीं आएगी। चड्ढा ने कहा, “हमने यह निर्णय राष्ट्रहित और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए लिया है।” उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भी इस फैसले पर अपनी मुहर लगाई, जो अब तक अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रणनीतिकार माने जाते थे।
AAP “गलत पार्टी में सही आदमी” – राघव चड्ढा का छलका दर्द
अपनी पुरानी पार्टी पर तीखा हमला करते हुए राघव चड्ढा ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्होंने अपनी जवानी के 15 साल जिस संगठन को दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिकता से पूरी तरह भटक चुका है। उन्होंने कहा:
“मुझे पिछले कुछ वर्षों से लगातार यह महसूस हो रहा था कि मैं एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति बनकर रह गया हूं। हम यहाँ करियर बनाने नहीं, बल्कि देश सेवा के लिए आए थे, लेकिन अब यह पार्टी केवल निजी स्वार्थों और पद के लालच तक सीमित रह गई है।”
चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से इस पार्टी का जन्म हुआ था, आज वह उसी की धज्जियां उड़ा रही है।
AAP संजय सिंह का पलटवार: ‘ऑपरेशन लोटस’ और पंजाब का अपमान
इस बगावत के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने मोर्चा संभाला और इसे भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पंजाब की भगवंत मान सरकार के जनहित कार्यों को रोकने की एक गहरी साजिश है। संजय सिंह ने कहा कि पंजाब में मिल रही 300 यूनिट मुफ्त बिजली, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से भाजपा घबरा गई है।
उन्होंने सातों सांसदों— अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी और हरभजन सिंह —का नाम लेते हुए उन्हें ‘गद्दार’ बताया। सिंह ने कहा, “इन लोगों को पार्टी ने फर्श से उठाकर अर्श तक पहुँचाया, विधायक और सांसद बनाया, लेकिन इन्होंने पंजाब की जनता की पीठ में छुरा घोंपा है। पंजाब के लोग इस धोखे को कभी भुला नहीं पाएंगे।”
AAP भविष्य की राजनीति पर प्रभाव
इस घटनाक्रम के बाद पंजाब और दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक ओर भाजपा इसे अपनी ‘विकासवादी राजनीति’ की जीत बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह अस्तित्व का संकट बनता जा रहा है। 7 सांसदों का एक साथ जाना यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर असंतोष की खाई बहुत गहरी हो चुकी है।
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