रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Varanasi : धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के नवनियुक्त जगतगुरु सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी महाराज का प्रथम आगमन किसी उत्सव से कम नहीं रहा। जगतगुरु के पद पर प्रतिष्ठित होने के बाद पहली बार भगवान शिव की नगरी पहुंचे महाराज का संतों, श्रद्धालुओं और हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व स्वागत किया। शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस अभिनंदन समारोह ने काशी के धार्मिक वातावरण को और भी गौरवमयी बना दिया।
Varanasi जूना अखाड़े में भव्य अगवानी और देवाधिदेव का पूजन
अपने प्रवास की शुरुआत में जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी हनुमान घाट स्थित श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े पहुंचे। यहाँ अखाड़े की परंपरा के अनुसार संतों ने उनकी अगवानी की।
- विधि-विधान: महाराज ने जूना अखाड़ा के आराध्य भगवान दत्तात्रेय, संकटमोचन हनुमान और भगवान भोलेनाथ के विग्रहों का विधिवत पूजन-अर्चन किया।
- अभिषेक: अखाड़े के पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र और मालाएं अर्पित कर सम्मानित किया।
इसके पश्चात उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेका। स्वर्ण शिखर के सानिध्य में जब उन्होंने पूजन किया, तो पूरा परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मंदिर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने उन्हें महादेव का प्रसाद भेंट किया।
Varanasi जपेश्वर मठ में संतों का समागम और आशीर्वाद
वाराणसी के कमच्छा स्थित जपेश्वर मठ में एक विशेष अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। यहाँ जूना अखाड़े के वरिष्ठ संतों—सौरभ आनंद गिरी, योगानंद सरस्वती और सुखदेवानंद गिरी सहित कई विद्वानों ने जगतगुरु का स्वागत किया।
इस अवसर पर जगतगुरु जी ने उपस्थित संतों को सम्मानित करते हुए उन्हें दक्षिणा भेंट की और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि काशी की ऊर्जा पूरे विश्व को शांति का संदेश देती है। कार्यक्रम के अंत में काशी की प्रसिद्ध मलाई-रबड़ी और दही का प्रसाद वितरित किया गया, जिसका संतों और श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
Varanasi हिंदू महासभा की उपस्थिति और वैचारिक मंथन
जगतगुरु जी के स्वागत में अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अनूप मिश्रा, संगठन मंत्री राजकुमार सिंह और प्रदेश प्रभारी श्रीकांत पांडे सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने महाराज का अभिनंदन किया। हिंदू महासभा ने इसे सनातन संस्कृति की विजय और मजबूती का प्रतीक बताया।
काशी में अपने प्रवास और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को पूर्ण करने के बाद, जगतगुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरी जी सड़क मार्ग से प्रयागराज के लिए प्रस्थान कर गए। उनकी यह यात्रा न केवल जूना अखाड़े के लिए, बल्कि समूचे हिंदू समाज के लिए एक नई चेतना और आध्यात्मिक जागृति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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