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रिपोर्टर: प्रेम कुमार श्रीवास्‍तव

Jamshedpur : झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा घोषित 8वीं बोर्ड के परिणामों ने राज्य में एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। संथाली विषय की परीक्षा देने वाले छात्रों को सामूहिक रूप से “D ग्रेड” दिए जाने के बाद आदिवासी समाज में गहरा रोष व्याप्त है। इस घटनाक्रम को लेकर जमशेदपुर के बिस्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जहाँ सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

संवाददाता सम्मेलन में प्रम श्रीवास्तव की रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि संथाली भाषा और लिपि के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

Jamshedpur उत्तरपुस्तिकाओं की भौतिक जांच और उच्च स्तरीय जांच की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान सामाजिक प्रतिनिधियों ने मांग की कि जिन छात्रों को “D ग्रेड” दिया गया है, उनकी उत्तरपुस्तिकाओं की फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक जांच) फिर से की जाए।

  • संदेह का घेरा: प्रतिनिधियों का तर्क है कि बड़ी संख्या में छात्रों का एक साथ खराब प्रदर्शन करना सांख्यिकीय रूप से संदिग्ध है।
  • पारदर्शिता की कमी: समाज ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मूल्यांकन प्रक्रिया में ओल चिकी लिपि के जानकारों को शामिल किया गया था या नहीं।

Jamshedpur ओल चिकी लिपि को मान्यता और शैक्षणिक ढांचे में सुधार

यह विवाद केवल एक परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संथाली भाषा के अस्तित्व और उसकी लिपि ‘ओल चिकी’ के सम्मान से जुड़ा है। सम्मेलन में सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:

  • प्रथम राजभाषा का दर्जा: संथाली भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा के रूप में आधिकारिक मान्यता दी जाए।
  • शिक्षकों की बहाली: स्कूलों में ओल चिकी लिपि के माध्यम से शिक्षा देने के लिए योग्य संथाली शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की जाए।
  • JTET में मान्यता: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में ओल चिकी लिपि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए ताकि भविष्य के शिक्षकों को अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने की सुविधा मिले।

Jamshedpur उग्र आंदोलन की चेतावनी: ‘आर-पार’ की लड़ाई

आदिवासी समाज के अगुवाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी भाषाई पहचान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे। यदि सरकार और जैक बोर्ड इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर सुधार नहीं करते हैं, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार है।

  • चरणबद्ध प्रदर्शन: समाज ने चेतावनी दी है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध शुरू करेंगे, जो समय आने पर उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
  • अस्मिता का सवाल: वक्ताओं ने कहा कि ओल चिकी लिपि आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान है और शैक्षणिक स्तर पर इसकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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