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Report by: Yogendra Singh

Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भीषण गर्मी के दस्तक देते ही जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। शहर के कई इलाकों में नल सूखने और दूषित जलापूर्ति से परेशान नागरिक अब सड़कों पर उतर आए हैं। सोमवार को जोन-3 कार्यालय का घेराव कर स्थानीय निवासियों और महिलाओं ने मटका फोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। “पानी दो या इस्तीफा दो” के नारों से निगम कार्यालय घंटों गूंजता रहा।

Raipurपॉश इलाकों में भी प्यास का पहरा: शंकर नगर और शांति नगर बेहाल

आमतौर पर शहर के वीआईपी और पॉश माने जाने वाले इलाकों में भी स्थिति बदतर हो गई है। जोन-3 के अंतर्गत आने वाले शंकर नगर, खम्हारडीह और न्यू शांति नगर जैसे क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से नियमित जल आपूर्ति ठप है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि सुबह-शाम नलों में पानी नहीं आ रहा है और जहाँ आपूर्ति हो रही है, वहाँ पानी का दबाव इतना कम है कि एक बाल्टी भरना भी दूभर हो गया है। टैंकरों के भरोसे हजारों की आबादी प्यास बुझाने को मजबूर है।

Raipur विपक्ष का तीखा हमला: महापौर और निगम प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

इस प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी और कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि महापौर और निगम प्रशासन अमृत मिशन और नई पाइपलाइन के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि धरातल पर लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर जलापूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

Raipur निगम की चुप्पी और जनता की बेबसी

बार-बार शिकायतों के बावजूद जोन कार्यालय के अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब भी वे शिकायत लेकर आते हैं, उन्हें केवल आश्वासन मिलता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के अन्य जोनों से भी ऐसी ही शिकायतें सामने आ रही हैं। वर्तमान में राजधानी के कई वार्डों में लोग निजी टैंकरों के लिए मोटी रकम चुकाने को विवश हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक निकाल पाता है।

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