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Report by: Prem Kumar Srivastwa

Jamshedpur : बहरागोड़ा थाना क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब स्वर्णरेखा नदी के तट पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय का एक अत्यंत शक्तिशाली जीवित बम बरामद हुआ। लगभग 227 किलोग्राम (500 पाउंड) वजनी इस संदिग्ध बम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन से लेकर रक्षा मंत्रालय तक सतर्क हो गया है। फिलहाल, भारतीय सेना के विशेषज्ञों ने मोर्चा संभाल लिया है और बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय (डीफ्यूज) करने की तैयारी अंतिम चरण में है।

भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम मौके पर, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Jamshedpur पानीपाड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के किनारे मिले इस विशालकाय बम की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की एक विशेष यूनिट घटनास्थल पर पहुँच चुकी है। लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में आई विशेषज्ञों की टीम ने बम की संरचना और उसकी मारक क्षमता का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण किया है।

चूँकि बम दशकों पुराना है, इसलिए इसकी संवेदनशीलता और भी अधिक बढ़ गई है। सेना की टीम यह सुनिश्चित कर रही है कि इसे नष्ट करते समय आसपास के पर्यावरण या आबादी को कोई नुकसान न पहुँचे।

वैज्ञानिक पद्धति से निष्क्रिय करने की रणनीति: ‘सैंडबैग और गहरा गड्ढा’

Jamshedpur बम की अत्यधिक विनाशकारी शक्ति को नियंत्रित करने के लिए सेना और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से वैज्ञानिक सुरक्षा घेरा तैयार किया है:

  • सुरक्षा दीवार: विस्फोट के प्रभाव और उसके छर्रों को रोकने के लिए बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों (Sandbags) की कई परतें ऊँची दीवार की तरह खड़ी की गई हैं।
  • दबाव नियंत्रण: एक विशेष गहरा गड्ढा खोदा गया है, ताकि जब बम को नियंत्रित विस्फोट के जरिए निष्क्रिय किया जाए, तो उसकी ऊर्जा और शॉकवेव्स जमीन के अंदर ही अवशोषित हो सकें।

एक किलोमीटर का दायरा सील, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

Jamshedpur ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने घटनास्थल के एक किलोमीटर के दायरे को ‘नो-गो ज़ोन’ घोषित कर दिया है। पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और आम नागरिकों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

स्थानीय ग्रामीणों के बीच दहशत को देखते हुए प्रशासन ने अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा घेरे से दूर रहें। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किसी हवाई हमले या सैन्य गतिविधि का हिस्सा रहा होगा, जो उस समय नहीं फट पाया और अब नदी के कटाव के कारण सतह पर आ गया।

प्रशासन और सेना की टीमें मानक प्रोटोकॉल (Standard Protocol) के तहत पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अगले कुछ घंटों में इस ‘टाइम बम’ को हमेशा के लिए शांत कर दिया जाएगा।

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