Report by: Ishu Kumar
Baikunthpur : शहर के प्रमुख मनोरंजन और सार्वजनिक स्थल ‘इंदिरा पार्क’ की बदहाली की खबर प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद नगर पालिका परिषद ने त्वरित कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह से ही पार्क परिसर में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया। हालांकि, इस आनन-फानन में की गई कार्रवाई ने शहर की आंतरिक व्यवस्था को बिगाड़ दिया है।
मीडिया के दबाव में जागा प्रशासन, इंदिरा पार्क का बदला चेहरा
Baikunthpur लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहे इंदिरा पार्क की स्थिति दयनीय हो चुकी थी। चारों ओर फैली गंदगी और झाड़ियों के कारण नागरिकों का यहाँ बैठना दूभर हो गया था। स्थानीय समाचार माध्यमों ने जब इस मुद्दे को उठाया और पार्क की वास्तविक स्थिति को जनता और अधिकारियों के सामने रखा, तब जाकर नगर पालिका प्रशासन सक्रिय हुआ। मंगलवार सुबह से ही स्वच्छता अमला पार्क में तैनात कर दिया गया। पार्क की झाड़ियों की छंटाई, कचरे का उठान और पैदल रास्तों की सफाई की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही पार्क को अपनी पुरानी रौनक वापस मिल जाएगी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को कार्रवाई के लिए हमेशा किसी बड़े दबाव या खबर का इंतजार रहता है?
वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव: शहर की सफाई ठप, ‘दीदियों’ पर बढ़ा बोझ
Baikunthpur प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब यह पता चला कि इंदिरा पार्क को चमकाने के लिए शहर की नियमित सफाई व्यवस्था को दांव पर लगा दिया गया है। नगर पालिका ने ‘डोर-टू-डोर’ कचरा संग्रहण कार्य में जुटी 52 सफाई दीदियों को उनके नियमित वार्डों से हटाकर पार्क की सफाई में झोंक दिया। इसका सीधा असर शहर के रिहायशी इलाकों पर पड़ा। शहर के कई हिस्सों में कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुँची, जिससे गलियों और मुख्य मार्गों पर कूड़े के ढेर लगने शुरू हो गए हैं। एक जगह की व्यवस्था सुधारने के चक्कर में पूरे शहर की स्वच्छता प्रणाली को प्रभावित करना नगर पालिका के कुप्रबंधन को दर्शाता है। नागरिकों में इस बात को लेकर रोष है कि उनके वार्डों की सफाई रोककर केवल एक स्थान को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है।
कागजी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर: कर्मचारियों की गैर-हाजिरी
Baikunthpur सफाई अभियान के बीच नगर पालिका की आंतरिक अनुशासनहीनता भी उजागर हुई है। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर दावा किया था कि इंदिरा पार्क की देखरेख और विशेष अभियान के लिए 10 नियमित कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। परंतु, जब मौके पर निरीक्षण किया गया तो स्थिति इसके विपरीत मिली। कई कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए। यह लापरवाही दर्शाती है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। 52 सफाई दीदियों के कड़े परिश्रम के बावजूद, मुख्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने इस अभियान की गंभीरता को कम कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्य नगर पालिका अधिकारी इन अनुपस्थित कर्मचारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करते हैं या यह अभियान केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।
Also Read This: Colombia Plane Crash: भीषण विमान हादसा, अमेज़न के जंगलों में सैन्य विमान C-130 क्रैश, 110 सैनिकों की सुरक्षा पर संशय

