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Report by: Prabhat Kumar

Godda : चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर गोड्डा जिले का ठाकुर गंगटी प्रखंड पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। क्षेत्र के कजरेल, रूंजी, मानिकपुर और खनीचक जैसे गांवों में स्थित चैती दुर्गा मंदिरों में कलश स्थापना के साथ ही विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। इस वर्ष भी परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धा और उल्लास के साथ मां दुर्गा की आराधना की जा रही है, जिसमें स्थानीय पूजा समितियों के पदाधिकारी और सदस्य तन-मन-धन से समर्पित हैं।

वृंदावन और मथुरा के कथावाचकों द्वारा ज्ञान की वर्षा

Godda इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण विभिन्न गांवों में आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा है। कजरेल, रूंजी और सिल्क नगर भगैया में देश के विख्यात केंद्रों से आए कथावाचक अपनी अमृतवाणी से श्रद्धालुओं को निहाल कर रहे हैं:

  • कजरेल: यहाँ वृंदावन से पधारीं प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी प्रीति रामानुज जी भागवत के रहस्यों को साझा कर रही हैं।
  • रूंजी: यहाँ भी वृंदावन धाम के विख्यात कथा वाचक चंदन शरण जी महाराज द्वारा कथा वाचन किया जा रहा है।
  • भगैया: मथुरा नाथ धाम से पधारीं लाडली कृष्ण प्रिया जी नियमित रूप से श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग का दर्शन करा रही हैं।

इन तीनों स्थलों पर प्रतिदिन शाम 7:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक धार्मिक मंत्रोच्चार और ग्रंथों के आधार पर विस्तार से कथा सुनाई जा रही है, जिसे सुनने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।

अष्टमी और नवमी पर विशेष प्रवचन का आयोजन

Godda पूजा के विशेष दिनों यानी अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर भी भव्य तैयारियां की गई हैं। खनीचक मंदिर के पुरोहित धनंजय मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि इन विशेष तिथियों पर देश के प्रचलित प्रवचनकर्ता परम पूज्य स्वामी पलटू दास जी महाराज का आगमन हो रहा है। उनके द्वारा विशेष प्रवचन के माध्यम से ज्ञान की वर्षा कराई जाएगी, जो इस पूजा महोत्सव का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र होगा।

शांतिपूर्ण वातावरण और समितियों की सक्रियता

Godda पूरे प्रखंड क्षेत्र में पूजा और कथा का आयोजन अत्यंत शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हो रहा है। स्थानीय पूजा समितियां न केवल व्यवस्था संभालने में जुटी हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रख रही हैं। रात के समय आयोजित होने वाली इन कथाओं में विधि-विधान और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण सात्विक और भक्तिपूर्ण बना हुआ है।

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