Report by: Ishu Kumar
Balrampur Ayush Center Inspection : जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और आयुष केंद्रों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। हाल ही में जिला आयुष अधिकारी डॉ. दिलीप कुमार यादव ने जिले के विभिन्न आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक औषधालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेना और मरीजों को मिल रही चिकित्सा सेवाओं की जमीनी हकीकत परखना था।
औषधालयों की व्यवस्था और दवाओं के रखरखाव का जायजा
Balrampur Ayush Center Inspection निरीक्षण के दौरान डॉ. यादव ने आयुष केंद्रों की बुनियादी सुविधाओं और वहां की व्यवस्थाओं का गहनता से अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से औषधियों के भंडारण (Storage) और उनके रखरखाव की स्थिति की जांच की। डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि दवाओं को सुरक्षित और मानक परिस्थितियों में रखा जाए ताकि उनकी प्रभावशीलता बनी रहे।
इसके साथ ही, उन्होंने केंद्र के कर्मचारियों को दस्तावेजों के संधारण (Documentation) को लेकर कड़े निर्देश दिए। उनका कहना था कि मरीजों का रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर पूरी तरह पारदर्शी और अपडेटेड होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक जांच या ऑडिट के समय कोई विसंगति न पाए जाए।
लापरवाही पर कड़ा प्रहार: अनुपस्थित चिकित्सकों पर कार्रवाई के निर्देश
Balrampur Ayush Center Inspection इस निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मामला कुछ चिकित्सकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति का रहा। ड्यूटी के समय केंद्रों से नदारद पाए गए स्वास्थ्य कर्मियों पर जिला आयुष अधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसी आवश्यक सेवाओं में अनुशासनहीनता और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है।
डॉ. यादव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो चिकित्सक बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के गायब मिले हैं, उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
स्वच्छता और अनुशासित कार्य संस्कृति पर विशेष जोर
Balrampur Ayush Center Inspection अस्पताल परिसर में स्वच्छता को लेकर डॉ. यादव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि एक आयुष केंद्र की पहली पहचान उसकी साफ-सफाई से होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कर्मचारियों को कार्य के प्रति जिम्मेदारी निभाने और एक अनुशासित कार्य संस्कृति विकसित करने की हिदायत दी।
उनका मुख्य संदेश यह था कि आयुष केंद्रों का प्राथमिक लक्ष्य मरीजों को बेहतर और सुलभ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए केंद्रों पर मौजूद स्टाफ को न केवल समय का पाबंद होना होगा, बल्कि सेवा भाव के साथ मरीजों की देखभाल भी करनी होगी।
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