Report by: Ratan Kumar
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले में लंबे समय से फल-फूल रहे अवैध बालू खनन के काले कारोबार पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चला है। पिछले नौ महीनों से सुस्त पड़े खनन विभाग ने अचानक सक्रियता दिखाते हुए माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला उपायुक्त रवि आनंद और जिला खनन पदाधिकारी मिहिर सालकर के कड़े रुख के बाद विशेष जिला टास्क फोर्स (DTF) ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है, जिससे बालू तस्करों के बीच हड़कंप का माहौल है।

नाला विधानसभा क्षेत्र में बड़ी रिकवरी: जंगल में छिपाई गई थी बालू की खेप
Jamtara प्रशासनिक सक्रियता का सबसे बड़ा असर नाला विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला। पिछले 72 घंटों के भीतर यहाँ दो प्रमुख कार्रवाई की गईं, जिसमें कुल 24,000 CFT अवैध बालू बरामद किया गया है। मंगलवार को माइनिंग इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार और नाला थाना प्रभारी राजीव कुमार की संयुक्त टीम ने महेशमुंडा और रूनाकूड़ा घाट के पास सघन तलाशी अभियान चलाया।
हैरानी की बात यह रही कि माफियाओं ने पकड़े जाने के डर से भारी मात्रा में बालू को घने जंगलों के बीच छिपा कर रखा था। इस 15,000 CFT बालू को वहां से हटाने और जब्त करने के लिए प्रशासन को तीन जेसीबी मशीनों और दर्जनों हाईवा का सहारा लेना पड़ा। इससे पहले शनिवार को बिन्दापाथर के तुम्बाबेला इलाके में भी 9,000 CFT बालू जब्त किया गया था, जिसके बाद अज्ञात तस्करों पर प्राथमिकी दर्ज कर उनकी तलाश तेज कर दी गई है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क और रात का काला खेल: बिहार से नेपाल तक सप्लाई
Jamtara प्रशासन की इन कार्रवाइयों ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सूत्रों के मुताबिक, जामताड़ा के घाटों से निकलने वाला यह ‘पीला सोना’ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों और देशों तक पहुँच रहा है। बताया जा रहा है कि शाम ढलते ही जामताड़ा प्रखंड के पंजनियां पंचायत स्थित बाड़ेडीह घाट जैसे इलाकों में माफियाओं का राज शुरू हो जाता है।
रात के अंधेरे में नावों के जरिए बालू को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाता है, जहाँ से हाईवा के माध्यम से इसे बिहार, पश्चिम बंगाल और यहाँ तक कि नेपाल की सीमाओं तक भेजा जा रहा है। प्रतिदिन लाखों रुपये के इस अवैध टर्नओवर ने न केवल सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया है, बल्कि स्थानीय पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
प्रशासनिक तंत्र पर उठते सवाल: नौ महीने की सुस्ती का जिम्मेदार कौन?
Jamtara हालाँकि वर्तमान कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन इसने जिले के प्रशासनिक और निगरानी तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और जानकारों का पूछना है कि जब जून महीने से ही अवैध खनन अनवरत जारी था, तो खनन विभाग आखिर नौ महीने तक किस ‘मजबूरी’ के चलते खामोश रहा?
सवाल यह भी है कि पुलिस और माइनिंग विभाग के दावों के बावजूद पंजनियां जैसे संवेदनशील घाटों पर अब भी तस्करी क्यों नहीं थम पा रही है? क्या इन माफियाओं को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है? जिले की जनता अब यह उम्मीद कर रही है कि यह अभियान केवल कुछ दिनों की ‘खानापूर्ति’ बनकर न रह जाए, बल्कि बालू के इस अवैध खेल की जड़ों पर प्रहार किया जाए ताकि सरकारी संपदा की लूट बंद हो सके।
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