New Delhi : इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गई है। युद्ध के 11वें दिन ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की सबसे कमजोर नस यानी ‘तेल आपूर्ति’ पर प्रहार करने की सीधी धमकी दी है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो वे दुनिया की तेल सप्लाई ठप कर देंगे।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की घेराबंदी: “राजदूत निकालो या तेल भूलो”
New Delhi दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) से होकर गुजरता है। ईरान ने अब इस रास्ते को ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
- ईरान की शर्त: जो देश इस समुद्री रास्ते का उपयोग करना चाहते हैं, उन्हें अपने यहाँ से इजराइली और अमेरिकी राजदूतों को तुरंत निष्कासित करना होगा।
- सुरक्षा टैक्स: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान अब अमेरिकी सहयोगी देशों के जहाजों से भारी ‘सुरक्षा शुल्क’ वसूलने की योजना बना रहा है।
- ट्रंप का पलटवार: इधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने अब तक ईरान के 46 युद्धपोतों को नेस्तनाबूद कर दिया है, जिससे तनाव चरम पर है।
खेल के मैदान में बगावत: ईरानी महिला फुटबॉलरों ने ऑस्ट्रेलिया में ली शरण
New Delhi युद्ध और कट्टरपंथ के बीच ईरान के भीतर से भी विद्रोह की खबरें आ रही हैं। एशियन कप के दौरान अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने वाली पांच महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने वतन लौटने से इनकार कर दिया है।
फतेमेह पसंदिदेह, जहरा घनबारी, जहरा सरबली, अतेफे रमजानजादेह और मोना हमौदी ने मैच से पहले राष्ट्रगान न गाकर विरोध जताया था। सजा के डर से इन खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगी थी, जिसे ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने स्वीकार करते हुए उन्हें मानवीय वीजा दे दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इन खिलाड़ियों को अमेरिका में पनाह देने की पेशकश की है।
सुलगती सीमाएं: तुर्किये में पैट्रियट तैनात, मिस्र में हाहाकार
New Delhi युद्ध की लपटें अब पड़ोसी मुल्कों को अपनी चपेट में ले रही हैं:
- तुर्किये: ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के हवाई क्षेत्र में घुसने के दावे के बाद तुर्किये ने नाटो (NATO) की मदद से अपनी सीमा पर अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया है।
- मिस्र: तेल संकट के कारण मिस्र में ईंधन की कीमतों में 30% का उछाल आया है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित है।
- सऊदी और इराक: सऊदी अरब के रिहायशी इलाकों और इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे रहे हैं।
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