Report by: Sanjeev Kumar
Bokaro : झारखंड के बोकारो जिले में निजी स्कूलों और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। मामला स्कूली किताबों की सूची सार्वजनिक करने से जुड़ा है। उपायुक्त अजय नाथ झा ने स्कूलों के उस ‘कॉकर’ (Cochas) को तोड़ने के लिए कड़े निर्देश दिए थे, जिसके तहत अभिभावकों को किसी खास दुकान से महंगी किताबें खरीदने पर मजबूर किया जाता है।


क्या था उपायुक्त का आदेश और क्यों मची रार?
Bokaro गत 11 फरवरी को बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने निजी स्कूलों के प्रबंधन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य किताबों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता लाना था। डीसी ने सख्त आदेश दिया था कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से 45 दिन पूर्व यानी 25 फरवरी 2026 तक सभी स्कूलों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर किताबों की पूरी सूची (Book List) सार्वजनिक करनी होगी।
प्रशासन का तर्क था कि यदि बुक लिस्ट पहले से उपलब्ध होगी, तो अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खुले बाजार से किताबें खरीद सकेंगे। लेकिन 25 फरवरी की समयसीमा बीत जाने के कई दिनों बाद भी जिले के कई बड़े स्कूलों ने इस पर अमल नहीं किया है।
रडार पर जिले के नामी स्कूल: अभिभावक संघ में भारी रोष
Bokaro हैरानी की बात यह है कि इस आदेश की अनदेखी करने वालों में बोकारो के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल शामिल हैं। इनमें डीपीएस (DPS), चिन्मया विद्यालय, एमजीएम (MGM), जीपीएस (GPS) और अय्यप्पा स्कूल जैसे नाम सामने आए हैं। इन विद्यालयों की वेबसाइट पर अब तक किताबों की सूची अपलोड नहीं की गई है।
इस लापरवाही पर झारखंड अभिभावक महासंघ के जिला संरक्षक राकेश कुमार मधु ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि निजी विद्यालय जिले के सर्वोच्च अधिकारी (DC) के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। यह उनकी पुरानी मनमानी का हिस्सा है, जिससे वे अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकानों से महंगी सामग्री खरीदने के लिए विवश करते हैं।
प्रशासन का कड़ा रुख: डीडीसी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
Bokaro उपायुक्त के आदेशों की इस अवहेलना को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। उप विकास आयुक्त (DDC) शताब्दी मजूमदार ने इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की आंखों में धूल झोंकना और नियमों की अनदेखी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीडीसी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को तत्काल संज्ञान लेने और दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। प्रशासन अब इन स्कूलों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने की तैयारी में है, और यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।
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