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By: Ishu Kumar

Bokaro : नियोजन की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान मारे गए युवक प्रेम महतो को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रेम महतो की मां गोमती देवी विस्थापितों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई हैं। यह धरना बोकारो स्टील प्लांट के एडीएम बिल्डिंग के मुख्य द्वार पर शुरू किया गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

बताया जाता है कि 3 अप्रैल 2025 को नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों द्वारा आंदोलन किया जा रहा था। इसी दौरान हुए लाठीचार्ज में प्रेम महतो की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से ही परिजन और विस्थापित संगठन न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि घटना को लगभग एक वर्ष बीतने वाला है, लेकिन अब तक प्रशासन और प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

परिजनों का आरोप—प्रबंधन ने नहीं निभाया वादा

Bokaro धरने पर बैठी मृतक की मां गोमती देवी ने कहा कि उनके बेटे की मौत के बाद बोकारो स्टील प्रबंधन ने कई आश्वासन दिए थे। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की ओर से सेक्टर-4 से नयामोड़ के बीच करीब 20 डिसमिल जमीन देने की बात कही गई थी, ताकि वहां प्रेम महतो की प्रतिमा स्थापित की जा सके। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और करीब 1500 अप्रेंटिस की बहाली का भी आश्वासन दिया गया था।

गोमती देवी ने कहा कि इन वादों को पूरा करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया है, लेकिन न्याय की उम्मीद अब भी बाकी है। उन्होंने कहा कि आज इस आंदोलन में शामिल सभी लोग खुद को प्रेम महतो और प्रेम की मां मानकर संघर्ष कर रहे हैं। जब तक उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा।

विस्थापित नेताओं ने भी जताई नाराजगी

Bokaro धरने में शामिल विस्थापित नेता अजय महतो ने भी प्रशासन और प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रेम महतो को न्याय दिलाने के लिए वे लोग लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। इस सिलसिले में वे सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और बोकारो स्टील प्रबंधन के प्रतिनिधियों से भी मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है।

अजय महतो ने कहा कि विस्थापितों की मांग है कि उन्हें 20 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि 3 अप्रैल को शहादत दिवस के अवसर पर प्रेम महतो की प्रतिमा का अनावरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब उद्योग के लिए जमीन दी गई थी, तब लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें रोजगार और सम्मान मिलेगा। लेकिन आज स्थिति ऐसी हो गई है कि विस्थापितों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ रहा है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल प्रेम महतो की मां और विस्थापित समुदाय के लोग एडीएम बिल्डिंग के सामने धरने पर डटे हुए हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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