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By: Yogendra Singh

Dantewada : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला में चल रहे रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य ने स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। भांसी क्षेत्र के पास निर्माणाधीन रेलवे पुल के दौरान की गई खुदाई से आसपास के जलस्रोत प्रभावित हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी मशीनों से की गई खुदाई के कारण नाले में मिट्टी और मलबा भर गया, जिससे साफ बहने वाला पानी अब गंदा और लाल रंग का दिखाई दे रहा है। इस बदलाव ने न केवल पेयजल संकट खड़ा किया है, बल्कि खेती और पशुपालन पर भी असर डाला है।

भांसी क्षेत्र में खुदाई से जल स्रोत दूषित

Dantewada स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार कंपनी ने नाले के आसपास बड़े पैमाने पर खुदाई की। खुदाई से निकली मिट्टी और पत्थर सीधे पानी में जा मिले। परिणामस्वरूप, जो नाला पहले साफ और उपयोग योग्य था, वह अब मटमैला हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस कार्य से पहले न तो पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया गया और न ही जल स्रोत की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। इससे क्षेत्र की प्राकृतिक जलधारा बाधित हो गई है। पानी का रंग बदलने के साथ-साथ उसमें बदबू भी आने लगी है, जिससे लोग उसका उपयोग करने से डर रहे हैं।

पेयजल, सिंचाई और पशुधन पर गंभीर प्रभाव

Dantewada यह नाला भांसी, पोरोकमेली और कमेली जैसे गांवों के लिए मुख्य जल स्रोत है। ग्रामीण इसी पानी का उपयोग पीने, खाना बनाने, नहाने और कपड़े धोने के लिए करते आए हैं। खेतों की सिंचाई भी इसी पर निर्भर है।

पानी दूषित होने से फसलों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि गंदे पानी से सिंचाई करने पर उत्पादन घट सकता है। वहीं मवेशियों के बीमार पड़ने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।

महिलाओं और बुजुर्गों को दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, जिससे उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों की मांग और आंदोलन की चेतावनी

Dantewada प्रभावित गांवों के लोगों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं कि नाले की सफाई कर पानी को फिर से स्वच्छ बनाया जाए और तब तक के लिए वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर उनकी बुनियादी जरूरतों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर स्थिति पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और प्रभावित गांवों को कब तक राहत मिलती है।

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