Doklam disputeDoklam dispute
Spread the love

Doklam dispute:

  1. राहुल गांधी के बयान के जवाब में BJP का पलटवार
  2. पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का पुराना वीडियो साझा कर BJP ने कहा—भारत ने एक इंच जमीन नहीं खोई

नई दिल्ली: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा और डोकलाम विवाद का मुद्दा उठाया। उनके बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी संसद और देश से छुपाने का आरोप लगाया। उन्होंने डोकलाम विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि जो कुछ सीमा पर हुआ, उसकी वास्तविक स्थिति देश के सामने नहीं रखी गई। अपने दावों के समर्थन में राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित किताब और एक मैगजीन लेख का हवाला दिया, जिससे विवाद और गहरा गया।

Doklam dispute: BJP ने सोशल मीडिया पर किया जवाबी हमला

राहुल गांधी के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत पलटवार किया। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो साझा किया। यह वीडियो डोकलाम विवाद के समय का बताया जा रहा है, जिसमें जनरल नरवणे यह स्पष्ट कहते नजर आते हैं कि भारत ने अपनी “एक इंच जमीन भी नहीं गंवाई” है।

वीडियो में पूर्व सेना प्रमुख यह भी कहते हैं कि विवाद से पहले और बाद में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। उनके अनुसार, भारत को किसी भी तरह का क्षेत्रीय नुकसान नहीं हुआ और सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। BJP ने इस वीडियो के जरिए राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने और सेना के मनोबल पर सवाल खड़े करने का आरोप लगाया।

Doklam dispute: डिसएंगेजमेंट और समझौते पर क्या कहा गया था

जनरल नरवणे ने अपने पुराने बयान में यह भी कहा था कि भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया आपसी सहमति और समान सुरक्षा के सिद्धांतों के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना था। उन्होंने जोर देकर कहा था कि किसी भी स्तर पर भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया।

सरकार की कड़ी आपत्ति

राहुल गांधी द्वारा किताब और मैगजीन लेख का उल्लेख किए जाने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद में अप्रकाशित या अप्रमाणित सामग्री का हवाला देना उचित नहीं है। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर सरकार और सशस्त्र बलों के आधिकारिक बयानों पर भरोसा किया जाना चाहिए, न कि अप्रमाणित रिपोर्टों पर।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासी माहौल गरमा दिया है।

Also Read This: Pakistani Hindu refugees: नागरिकता के बाद भी छत का इंतजार