Pakistani Hindu refugeesPakistani Hindu refugees
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Pakistani Hindu refugees:

  1. पाकिस्तानी हिंदू परिवारों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
  2. मजनू का टीला में रह रहे नागरिकों को आवास न मिलने पर केंद्र से चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली: पाकिस्तान से भारत आए हिंदू शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलने के बावजूद अब तक स्थायी आवास न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल किए हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि जब इन लोगों को देश की नागरिकता दी जा चुकी है, तो फिर उन्हें सम्मानजनक जीवन के लिए पक्का घर क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया।

यह टिप्पणी जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू परिवारों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता मिलने के बाद भी इन परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गंभीर मुद्दा है।

Pakistani Hindu refugees: करीब 250 परिवारों को मिल चुकी है भारतीय नागरिकता

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मजनू का टीला क्षेत्र में रह रहे लगभग 250 पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है। इनमें से अधिकांश परिवार अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, जो वर्षों पहले धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान छोड़कर भारत आए थे। नागरिकता मिलने के बावजूद ये परिवार अभी भी अस्थायी बस्तियों में रहने को मजबूर हैं।

Pakistani Hindu refugees: केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय

केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिकारियों ने मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने यह भी साफ किया कि अगली सुनवाई तक मजनू का टीला से इन परिवारों को हटाने पर रोक लगाने वाला अंतरिम आदेश जारी रहेगा, ताकि किसी तरह की जबरन कार्रवाई न हो।

हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुआ मामला

इस मामले की कानूनी पृष्ठभूमि भी अहम है। 30 मई 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने शरणार्थियों की याचिका खारिज करते हुए उन्हें मजनू का टीला से हटाने की अनुमति दी थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए शरणार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इसके बाद 29 अगस्त 2025 को शीर्ष अदालत ने बेदखली पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और डीडीए को नोटिस जारी किया था।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सलाह

शरणार्थियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि नागरिकता मिलने के बाद इन परिवारों को पुनर्वास और आवास का अधिकार मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि इस मुद्दे को केवल फाइलों और प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वह उच्च स्तर पर विचार-विमर्श कर ठोस और मानवीय समाधान पेश करे, ताकि इन नागरिकों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सके।

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