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Life Rituals: इंदौर से ‘दिव्य संतान गर्भ संस्कार प्रकल्प’ का राष्ट्रीय शुभारंभ

By: Ishu Kumar

इंदौर में रविवार, 2 फरवरी 2026 को दिव्य संतान गर्भ संस्कार प्रकल्प का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भैयाजी जोशी ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो व्यक्ति के आचरण, सोच और जीवन मूल्यों को दिशा प्रदान करती है।

कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्धजन, चिकित्सक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Life Rituals: संस्कार आधारित जीवन दृष्टि का जन-जागरण

इंदौर के डेली कॉलेज परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भधारण से लेकर संतान के संस्कार निर्माण तक भारतीय परंपराओं के महत्व को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना है। वक्ताओं ने कहा कि दिव्य संतान गर्भ संस्कार प्रकल्प के माध्यम से संस्कारयुक्त जीवन दृष्टि को राष्ट्रव्यापी जन-जागरण के रूप में स्थापित किया जाएगा।

प्रकल्प के राष्ट्रीय संयोजक पं. डॉ. योगेंद्र महंत ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भैयाजी जोशी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहे।

Life Rituals: दीप प्रज्ज्वलन और विमोचन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चार के साथ हुआ। मंच पर अशोक पांडे, गुलवंत कोठारी, पं. डॉ. योगेंद्र महंत, राधेश्याम शर्मा, विक्रम सिंह, विनोद अग्रवाल, डॉ. अनिल गर्ग और डॉ. हितेश जॉनी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. अनिल गर्ग और डॉ. सीमा गर्ग के प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन संध्या चौकसे ने किया और आभार विनोद अग्रवाल ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम में 151 नवदंपतियों को दिव्य संतान प्रकल्प का संकल्प भी दिलाया गया।

Life Rituals: भारत संस्कारों से समृद्ध राष्ट्र है: भैयाजी जोशी

अपने संबोधन में भैयाजी जोशी ने कहा कि भारत केवल आर्थिक या सामरिक दृष्टि से सुपर पावर बनने की ओर अग्रसर नहीं है, बल्कि यह संस्कारों से समृद्ध सुपर राष्ट्र है।

उन्होंने कहा कि समय के साथ अनेक प्राचीन परंपरागत विधाएं लुप्त होती जा रही हैं, जिन्हें समाज के बीच फिर से जीवंत करना आवश्यक है। गर्भ संस्कार और दिव्य संतान का यह प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने इंदौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां से उठे विचार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

गर्भ संस्कार से आनुवंशिक रोगों में कमी संभव

चिकित्सक डॉ. हितेश जॉनी ने कहा कि भारतीय परंपराओं में निहित गर्भ संस्कार की अवधारणा का वैज्ञानिक आधार भी है। उन्होंने बताया कि सही आहार, संयम और जीवनशैली अपनाकर गर्भ संस्कार के माध्यम से आनुवंशिक रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

उन्होंने आधुनिक जीवनशैली और रासायनिक आहार के डीएनए पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए गर्भधारण से पूर्व, गर्भावस्था के दौरान और बाद के समय में विशेष सावधानी की आवश्यकता पर जोर दिया।

संस्कारों की शुरुआत गर्भावस्था से ही होती है

विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिल गर्ग ने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से गर्भ संस्कार की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता की यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि उनकी संतान संस्कारवान बने और इसकी नींव गर्भावस्था के दौरान ही रखी जाती है।

उन्होंने बताया कि संगीत, खान-पान, वस्त्रों के रंग और मानसिक वातावरण का गर्भस्थ शिशु पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

संस्कृति में ही मानवता का विकास मार्ग: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मानवता के विकास का मार्ग हमारी संस्कृति और परंपराओं में निहित है। उन्होंने घोषणा की कि मेडिकल कॉलेजों में गर्भ संस्कार परामर्श केंद्रों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी।

महाभारत के अभिमन्यु और अष्टावक्र के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गर्भ संस्कार की भारतीय पद्धति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

आचरण से संस्कारों का निर्माण होता है

डॉ. अनिल गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि संतान केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि माता-पिता के आचरण से सीखती है। उन्होंने शुक्राणु और अंडाणु शोधन, मानसिक संतुलन और शुद्ध आहार के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि पूजन और आराधना भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता से दूरी बनी रहती है।

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