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BY: Yoganand Shrivastva

सिलवानी: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ‘यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन एक्ट 2026’ के विरोध में सिलवानी के सवर्ण समाज ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को समाज के सैकड़ों लोगों ने एकत्रित होकर इस कानून को पक्षपातपूर्ण करार दिया और राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नया नियम समानता के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

बजरंग चौराहे से तहसील कार्यालय तक निकाला पैदल मार्च

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत शहर के बजरंग चौराहे से हुई, जहाँ सवर्ण समाज के युवा और प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में एकत्र हुए। यहाँ से एक पैदल फ्लैग मार्च निकाला गया, जो शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ तहसील कार्यालय पहुँचा। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और तहसीलदार सुधीर शुक्ला के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

एक्ट के ‘सेक्शन 38’ पर गंभीर आपत्तियां

सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने इस रेगुलेशन एक्ट की विभिन्न धाराओं, विशेषकर सेक्शन 38, को भेदभावपूर्ण बताया है। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • प्रतिनिधित्व का अभाव: कॉलेज परिसरों में गठित होने वाली ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘इक्विटी कमेटी’ में सवर्ण समाज के किसी भी प्रतिनिधि को शामिल करने का प्रावधान नहीं है, जो न्याय की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
  • दुरुपयोग की आशंका: कानून में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे निर्दोष छात्रों और स्टाफ को फंसाए जाने का डर है।
  • संविधान का उल्लंघन: प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह एक्ट संविधान द्वारा प्रदत्त ‘समान अवसर’ की भावना के विपरीत है और सवर्ण समाज के युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बनाता है।

संशोधन न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के बाद समाज के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि यूजीसी ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और विवादित धाराओं में शीघ्र संशोधन नहीं किया, तो यह आंदोलन केवल सिलवानी तक सीमित नहीं रहेगा। सवर्ण समाज ने अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेश व्यापी व्यापक आंदोलन का आह्वान करने की बात कही है।