Report BY: Yoganand Shrivastava
Edit By: Ravindra Sikarwar
Indore: गीरथपुरा की त्रासदी, जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने 24 लोगों की जान ले ली। सैकड़ों लोग बीमार पड़े। यह हादसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और लापरवाही का परिणाम बताया गया। हालात इतने गंभीर थे कि इसे खुद सरकार ने जन स्वास्थ्य आपातकाल माना।
Indore: मुख्यमंत्री का आदेश और तत्कालीन कार्रवाई
बढ़ते जनआक्रोश के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटाया गया। सरकार ने संदेश दिया कि दोषियों पर सख़्त कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

Indore: उच्च-स्तरीय जांच की घोषणा, लेकिन ज़मीन पर क्या हुआ?
सरकार ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। साथ ही अतिरिक्त नगर आयुक्त और जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एक इंजीनियर को निलंबित किया गया। सवाल यह है कि क्या यही कार्रवाई 24 मौतों के लिए पर्याप्त थी?
Indore: नया आयुक्त, पुराना सिस्टम
2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी क्षितिज सिंघल को नया नगर निगम आयुक्त नियुक्त किया गया। सरकार ने इसे प्रशासनिक सुधार के तौर पर पेश किया, लेकिन मूल सवाल जस का तस रहा—असल जिम्मेदारों का क्या?

16 दिन में ही कहानी पलटी
जिन दिलीप यादव को दूषित पानी कांड के बाद हटाया गया था, उन्हें पहले पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव बनाया गया। लेकिन महज़ 16 दिन बाद ही उन्हें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक बना दिया गया। यह कदम सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रमोशन जैसा प्रतीत होता है।
सज़ा नहीं, इनाम!
24 लोगों की मौत के बाद जिस अफसर को हटाया गया, उसे एक प्रतिष्ठित निगम की कमान सौंप देना आम जनता की समझ से परे है। यह फैसला बताता है कि व्यवस्था में गलती करने वालों को दंड नहीं, बल्कि सुरक्षित और बेहतर पद दिए जाते हैं।
पीड़ित परिवारों के साथ दोहरा अन्याय
जिन परिवारों ने अपने बच्चों, बुज़ुर्गों और परिजनों को खोया, उनके लिए यह फैसला गहरे जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सवाल उठता है—क्या इन 24 जिंदगियों की कीमत इतनी कम थी?
सरकार की कथनी और करनी में फर्क
सरकार मंचों से जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन इंदौर जैसे गंभीर कांड में जिम्मेदार अधिकारी को सम्मानजनक पद देना, सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जनता का सीधा सवाल
क्या मध्य प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही की कीमत जनता अपनी जान देकर चुकाएगी और अफसर ऊंचे पदों पर बैठते रहेंगे?
इंदौर की 24 मौतें आज भी न्याय की राह देख रही हैं, लेकिन यह प्रमोशन उस उम्मीद को और कमजोर करता नज़र आ रहा है।
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