ओडिशा के बालासोर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले के भोगराई ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बिचित्रपुर जंगल में मंगलवार को पांच ऐसे अनोखे जानवर देखे गए, जिनकी बनावट और हुलिया काफी हद तक ‘ऑरंगुटान’ (प्राइमेट्स की एक प्रजाति) से मेल खाता है। अचानक घने जंगल में इस तरह के जीवों के मिलने से स्थानीय ग्रामीणों में कौतूहल और डर का माहौल बन गया, जिसके बाद तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।
जंगल में पेड़ों पर घूमते दिखे अजीबोगरीब जीव
बिचित्रपुर जंगल और उसके आसपास के पेड़ों के बीच इन पांचों जानवरों को घूमते हुए सबसे पहले स्थानीय लोगों ने देखा। ऑरंगुटान जैसे दिखने वाले इन जीवों की खबर इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने उत्सुकतावश इन जानवरों के वीडियो और तस्वीरें भी अपने कैमरों में कैद कर लीं, जो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गए हैं।
वन विभाग की टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर हरकत में आई वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए पांचों जानवरों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। इसके बाद उनकी मेडिकल जांच कराने के लिए उन्हें तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनके स्वास्थ्य और शारीरिक बनावट का परीक्षण किया जा रहा है।
ऑरंगुटान जैसे जीवों का मिलना खड़े कर रहा बड़े सवाल
वन विभाग और विशेषज्ञों के लिए यह सबसे बड़ा पहेली बना हुआ है कि ये जानवर इस जंगल तक कैसे पहुंचे। गौरतलब है कि ऑरंगुटान भारत के प्राकृतिक वनों के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि यह मुख्य रूप से एशियाई देशों जैसे सुमात्रा और बोर्नियो के वर्षावनों में पाए जाते हैं। ऐसे में ओडिशा के एक ग्रामीण जंगल में एक साथ पांच ऐसे जीवों का मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या इन्हें अवैध रूप से कैद करके रखा गया था और बाद में यहां छोड़ दिया गया? या फिर यह किसी अन्य प्रजाति के वन्यजीव हैं, जो सिर्फ देखने में ऑरंगुटान जैसे लगते हैं?
प्रजाति और उनके यहां तक पहुंचने की हो रही है जांच
फिलहाल वन विभाग इन जानवरों की शक्ल-सूरत के आधार पर कयास लगा रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर इनकी प्रजाति की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी। विभाग की टीमें इस बात की भी गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इन्हें तस्करी के जरिए लाया गया था या कोई अन्य कारण है। फिलहाल सभी पांचों जानवर वन विभाग की कड़ी निगरानी में हैं और उनके रहस्य से पर्दा उठाने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है।
