West Bengal ElectionWest Bengal Election
Spread the love

रिपोर्टर: ईशु कुमार

West Bengal Election : पश्चिम बंगाल में चुनावी रंजिश और हिंसा के पुराने इतिहास को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा के कड़े और ऐतिहासिक इंतजाम किए हैं। दूसरे चरण के मतदान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों को मैदान में उतारा गया है। यह कदम विशेष रूप से उन इलाकों के लिए उठाया गया है, जो ‘बमबाजी’ और राजनीतिक संघर्ष के लिए संवेदनशील माने जाते हैं।

West Bengal Election अभेद्य किले में तब्दील 7 विधानसभा क्षेत्र: NIA की सीधी निगरानी

चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना सहित कुल 7 प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों को सुरक्षा के लिहाज से ‘अति-संवेदनशील’ घोषित किया है। इनमें भांगड़, कस्बा, बरुईपुर और बिष्णुपुर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में NIA की टीमें न केवल सक्रिय हैं, बल्कि वे मतदान केंद्रों के आसपास की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही हैं। एजेंसी की मौजूदगी का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित आतंकी साजिश या संगठित हिंसा को मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विफल करना है।

West Bengal Election खुफिया इनपुट और बम बरामदगी: क्यों पड़ी केंद्रीय एजेंसी की जरूरत?

सुरक्षा एजेंसियों को मिले पुख्ता खुफिया इनपुट्स के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व मतदान में बाधा डालने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे बमों के इस्तेमाल की योजना बना रहे थे। हाल ही में भांगड़ में एक राजनीतिक कार्यकर्ता के परिसर से भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने के बाद तनाव और बढ़ गया था। इस घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत संज्ञान लिया और NIA ने 79 बमों की बरामदगी के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की। इसी खतरे को देखते हुए आयोग ने जमीन पर सख्त गश्त के आदेश दिए हैं।

West Bengal Election सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सुरक्षा का नया घेरा

पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को विस्तार देने का समर्थन किया था। शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ तालमेल बिठाकर एक मल्टी-लेयर सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है। मुख्य सड़कों से लेकर गांवों की गलियों तक सशस्त्र गश्ती दल तैनात हैं। प्रशासन का लक्ष्य पिछले चरणों में हुई छिटपुट घटनाओं से सीख लेते हुए इस बार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाना है।

Also Read This: Mahasamund LPG Scam: पुलिस कस्टडी में रखे टैंकरों से करोड़ों की गैस गायब, अधिकारी-माफिया गठजोड़ के आरोप