US-Iran AgreementUS-Iran Agreement
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US-Iran Agreement : अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से कोई टैक्स या टोल नहीं लिया जाएगा। हालांकि, वाशिंगटन ने यह भी साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद या प्रतिबंधों में ढील तभी मिलेगी, जब वह समझौते की शर्तों को पूरी तरह लागू करेगा। इस समझौते पर 19 जून को औपचारिक हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जिसके बाद दोनों देशों के पास अंतिम शांति समझौते का खाका तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय होगा।

US-Iran Agreement शर्तों पर टिकी $300 बिलियन की सहायता और फंड की सुरक्षा

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध से प्रभावित ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर (लगभग $300 billion) का एक फंड बनाने का प्रस्ताव है। लेकिन इस फंड की राशि का जारी होना पूरी तरह से ईरान के जमीनी प्रदर्शन और उसकी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने अमेरिकी करदाताओं को आश्वस्त करते हुए साफ कहा कि इस योजना में अमेरिका का कोई सीधा पैसा नहीं लगेगा। बल्कि ईरान के वैश्विक अर्थव्यवस्था में वापस आने और प्रतिबंधों के हटने से होने वाले व्यापारिक लाभ से यह समृद्धि आएगी।

US-Iran Agreement परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी और अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की वापसी

हालांकि यह शुरुआती समझौता (MoU) मात्र डेढ़ पन्ने का एक सामान्य दस्तावेज है, लेकिन इसमें सबसे पेचीदा मुद्दों को आगे की बातचीत के लिए रखा गया है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बताया कि इस समझौते का एक मुख्य हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण लगाना है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति मिलेगी, जो वहां मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) के स्टॉक को नष्ट करने में मदद करेंगे।

US-Iran Agreement हॉर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित करने और शुल्क को लेकर मतभेद

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों को देखते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द खोलना दोनों देशों की प्राथमिकता है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, शुक्रवार (19 जून) से यह मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा, लेकिन समुद्री सुरंगों (mines) को हटाने का काम अभी भी जारी है। हालांकि, शुल्क के मुद्दे पर दोनों पक्षों में थोड़ा मतभेद नजर आ रहा है; जहां अमेरिका इसे पूरी तरह ‘टोल-फ्री’ बता रहा है, वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि वे जहाजों से कोई ‘टोल’ नहीं, बल्कि ‘समुद्री सेवा शुल्क’ (maritime service fees) वसूलेंगे।

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