रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के सुपौल जिले में स्थापित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट्स (PWMU) से निकलने वाले प्रोसेस्ड प्लास्टिक के बेहतर निपटारे और फॉरवर्ड लिंकेज को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। 5 अक्टूबर 2026 को उप विकास आयुक्त (DDC) इन्द्रवीर कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना था। इस पहल से एक ओर जहाँ सड़कों की मजबूती बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
सड़क निर्माण में प्लास्टिक मिश्रण से बढ़ेगी गुणवत्ता
Supaul बैठक के दौरान ग्रामीण कार्य विभाग और पथ प्रमंडल के अभियंताओं ने स्पष्ट किया कि विभागीय मानकों के अनुसार सड़क निर्माण में निर्धारित अनुपात में प्रोसेस्ड प्लास्टिक मिलाए जाने से सड़कों की टिकाऊपन और गुणवत्ता में काफी सुधार आता है। यह तकनीक न केवल बारिश और पानी के प्रभाव से सड़क को बचाती है, बल्कि सड़क के जीवनकाल को भी बढ़ाती है।
जिले की 5 PWMU इकाइयों से आपूर्ति का निर्देश
Supaul उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार ने बताया कि वर्तमान में सुपौल जिले में कुल 5 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां (PWMU) सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इन इकाइयों में पर्याप्त मात्रा में प्रोसेस्ड प्लास्टिक कचरा उपलब्ध है। डीडीसी ने सड़क निर्माण से जुड़े सभी संबंधित विभागों और अभियंताओं को कड़ा निर्देश दिया कि वे जिले में चल रही सभी सड़क परियोजनाओं के लिए इन्हीं लोकल यूनिट्स से प्लास्टिक कचरा प्राप्त कर इस्तेमाल करें।
पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन को मिलेगी गति
Supaul बैठक में DRDA निदेशक आशुतोष कुमार और जिला समन्वयक सोनम कुमारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि इस कार्य योजना को अत्यंत गंभीरता से लागू करने की आवश्यकता है। गाँवों और शहरों से एकत्र हो रहे प्लास्टिक अपशिष्ट का उचित और स्थायी निपटान होने से स्थानीय पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा, जिससे सुपौल जिला स्वच्छ और हरित विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा।

