रिपोर्टर: कैलाश राज
Sidhi : मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित ‘लाइफ केयर हॉस्पिटल’ की बदहाली और सुरक्षा संबंधी खामियों का बड़ा खुलासा हुआ है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं इलाज और प्रसव के लिए पहुंचती हैं। इसके बावजूद संस्थान में बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ी हुई है।
रैंप सुविधा का अभाव: सीढ़ियों के सहारे प्रसूताओं को ले जाने की मजबूरी
Sidhi अस्पताल में नियमित रूप से औसतन 4 से 6 प्रसव कराए जाते हैं। इतनी अधिक संवेदनशील चिकित्सा गतिविधियों के बावजूद अस्पताल भवन में ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए रैंप अथवा लिफ्ट की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवप्रसूतों को कष्टदायी सीढ़ियों के सहारे ऊपर-नीचे ले जाना पड़ता है। स्ट्रेचर के लिए सुरक्षित रास्ते का न होना आपात स्थिति में किसी भी बड़े हादसे या मरीज की तबीयत ज्यादा बिगड़ने की वजह बन सकता है।
फायर सेफ्टी सिलेंडरों की एक्सपायरी डेट पर उठे सवाल
Sidhi अस्पताल की अग्नि सुरक्षा प्रणाली भी संदेह के घेरे में है। परिसर में आपात स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए अग्निशमन सिलेंडरों पर दर्ज रिफिलिंग और एक्सपायरी तिथियों को देखकर साफ होता है कि यहां लंबे समय से कोई सेफ्टी ऑडिट नहीं हुआ है। पुराने और समय-सीमा पार कर चुके सिलेंडरों के भरोसे पूरा अस्पताल संचालित हो रहा है, जो किसी अनहोनी के वक्त आग पर काबू पाने में पूरी तरह से निष्प्रभावी साबित हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक निगरानी पर उंगलियां, जांच के निर्देश
Sidhi इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। सवाल यह है कि अस्पताल का संचालन लाइसेंस जारी करने से पूर्व अनिवार्य सुरक्षा मानकों की जांच कैसे की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच टीम गठित कर अस्पताल का निरीक्षण कराने और खामियां पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी नियमानुसार सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

