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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Paris : पेरिस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस शहर में फ्रांस का पहला विशाल BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। यह भव्य परिसर न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों, आपसी सौहार्द और सामुदायिक जुड़ाव को भी नई दिशा देगा। लगभग 5,000 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैले इस मंदिर का आधिकारिक उद्घाटन सितंबर 2026 में 13 दिवसीय ऐतिहासिक ‘संस्कृति महोत्सव’ के साथ संपन्न होगा।

13 दिवसीय ‘संस्कृति महोत्सव’ के प्रमुख आकर्षण

Paris मंदिर के उद्घाटन के उपलक्ष्य में 2 से 14 सितंबर तक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महंत स्वामी महाराज के पावन कर-कमलों द्वारा 6 सितंबर को मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा का मुख्य समारोह संपन्न होगा। महोत्सव के दौरान निम्नलिखित प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:

  • 2 सितंबर: पालकी यात्रा
  • 2 से 13 सितंबर: वैदिक महायज्ञ
  • 3 सितंबर: जल यात्रा
  • 5 सितंबर: नगर यात्रा
  • 6 सितंबर: मूर्ति प्रतिष्ठा एवं समर्पण सभा
  • 13 सितंबर: महंत स्वामी महाराज जन्म जयंती
  • 14 सितंबर: भव्य हिंदू सांस्कृतिक उत्सव

अद्भुत वास्तुकला और स्थापत्य कला की विशेषताएं

Paris यह मंदिर पारंपरिक भारतीय शिल्पशास्त्र और आधुनिक फ्रेंच इंजीनियरिंग का एक अनूठा संगम है। ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर और निचले तल पर ‘मारू गुर्जर’ शैली में निर्मित एक भव्य सांस्कृतिक हवेली तैयार की गई है।

  • शिल्प और नक्काशी: मंदिर परिसर में 5 भव्य शिखर, 10 विशाल गुंबद, बारीक नक्काशी वाले 20 स्तंभ, 120 नक्काशीदार खिड़कियां, 49 मूर्तिकला पैनल और 4 सुंदर छतरियां बनाई गई हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय पत्थरों का उपयोग: इसके निर्माण के लिए ग्रीस, इटली, वियतनाम और भारत से विशेष संगमरमर तथा ग्वालियर से बलुआ पत्थर मंगाए गए हैं।
  • हस्तशिल्प का बेजोड़ नमूना: भारत के कुशल कारीगरों ने इन पत्थरों को हाथों से तराशा, जिसके बाद इन्हें असेंबल करने के लिए फ्रांस भेजा गया।

सामाजिक समरसता और सहअस्तित्व का संदेश

Paris मंदिर के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए महंत स्वामी महाराज ने कहा कि इस परिसर का निर्माण केवल किसी एक विशेष समुदाय की पहचान स्थापित करने के लिए नहीं हुआ है, बल्कि इसका मुख्य ध्येय विभिन्न संस्कृतियों और विचारों के लोगों को एक मंच पर लाना है। हमारे विचार और रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन आपसी सम्मान और सहअस्तित्व की भावना से सभी एक साथ जुड़ सकते हैं।

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