Organ Donation : मध्य प्रदेश में अंगदान की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में देशभर में हुए कुल 16,542 अंग प्रत्यारोपणों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी मात्र 1.6% थी। कैडेवरिक (मृत्यु के बाद) अंगदान की स्थिति और भी निराशाजनक है—जनवरी 2018 से जून 2023 के बीच राज्य में केवल 25 कैडेवरिक अंगदान दर्ज किए गए।
इसकी तुलना में तेलंगाना (883) और तमिलनाडु (713) जैसे राज्य कहीं आगे हैं। यह कमी केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त उन भ्रांतियों की भी है जो अंतिम समय में परिवारों को फैसला लेने से रोकती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या अंगदान वास्तव में धर्म के विरुद्ध है? सरकारी और धार्मिक दिशानिर्देश बताते हैं कि देश का कोई भी प्रमुख धर्म मानव हित में अंगदान का विरोध नहीं करता।

प्रमुख धर्मों का दृष्टिकोण: सेवा और करुणा का संदेश
Organ Donation अलग-अलग धर्मो के अनुसार दान और अंगदान की विभिन्न धरणाऐं हैा
हिंदू धर्म: हिंदू दर्शन में ‘दान’ का तात्पर्य केवल आर्थिक मदद से नहीं, बल्कि सामर्थ्य अनुसार दूसरों के कल्याण से है। आत्मा को अजर-अमर और शरीर को नश्वर माना गया है, इसलिए मृत्यु के बाद अंगदान आत्मा की यात्रा में बाधा नहीं बनता। महर्षि दधीचि द्वारा लोककल्याण के लिए अपनी अस्थियों का त्याग इसका अनुपम उदाहरण है।
इस्लाम: इस्लामी विद्वानों के बीच अंगदान को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण रहे हैं, लेकिन समकालीन विचारकों का मानना है कि जीवन बचाना एक पवित्र कार्य है। स्वेच्छा, निस्वार्थ भावना, अंगों के व्यापार पर रोक और दाता की सुरक्षा की शर्तों के साथ अंगदान को जायज माना गया है।
सिख एवं ईसाई धर्म: सिख परंपरा का मूल आधार ‘सरबत दा भला’ और निष्काम सेवा है, जहाँ जीवन बचाना परम धर्म माना गया है। वहीं, ईसाई धर्म में करुणा, प्रेम और मानवता की रक्षा के आधार पर अंगदान को परोपकार का सर्वोच्च रूप स्वीकार किया जाता है।
जैन धर्म: जैन दर्शन अहिंसा और करुणा पर टिका है। किसी के कष्ट को दूर करने और नया जीवन देने की भावना के तहत अंगदान को विवेकपूर्ण निर्णय माना जाता है।
भ्रांतियाँ और जागरूकता का अभाव: अंगदान में सबसे बड़ी बाधा
Organ Donation अंगदान के मार्ग में सबसे बड़ी चुनौती अंगों की उपलब्धता नहीं, बल्कि सही जानकारी की कमी और धार्मिक अनिश्चितता है। लोग अक्सर मृत्यु, अंतिम संस्कार और परलोक से जुड़ी रूढ़िवादी मान्यताओं के कारण संकोच में पड़ जाते हैं। अध्ययन भी दर्शाते हैं कि जब तक परिवार के मन से ये हिचकिचाहट दूर नहीं होगी, तब तक केवल अस्पताल या कानून के स्तर पर सुधार पर्याप्त नहीं होंगे।

स्वास्थ्य तंत्र और धार्मिक मंचों का साझा प्रयास अनिवार्य
Organ Donation मध्य प्रदेश में अंगदान की दर बढ़ाने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग पर निर्भर रहना काफी नहीं है। इसके लिए सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व को आगे आना होगा। जब मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च और जैन स्थानक जैसे मंचों से अंगदान को ‘जीवनदान’ बताने का साझा संदेश जाएगा, तब समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। विज्ञान और धर्म जब मिलकर मानव कल्याण के मार्ग पर चलेंगे, तभी राज्य में अंगदान के आंकड़े उम्मीद की नई किरण दिखा सकेंगे।
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