रिपोर्टर: विपिन साहू
Sheikh Hasina : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश वापसी को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया है। अगस्त 2024 में सरकार गिरने के बाद से भारत में रह रहीं अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वह आगामी दिसंबर महीने में अपने देश वापस लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, गिरफ्तारी और टॉर्चर का भी डर है, लेकिन इसके बावजूद देश की जनता के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए वह हर हाल में बांग्लादेश वापस जाएंगी। हालांकि, उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है, और समय आने पर इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
भारत सरकार और जनता का जताया आभार, 1975 की शरण को किया याद
Sheikh Hasina वॉशिंगटन में आयोजित वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने संकट की इस घड़ी में साथ देने के लिए भारत सरकार, वहां की जनता और सभी राजनीतिक दलों के प्रति दिल से आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें और उनके परिवार को एक बार फिर वैसी ही पनाह और अपनापन दिया है, जैसा 1975 में उनके पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद दिया गया था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के पुराने संस्मरणों को साझा करते हुए बताया कि 1981 और 2007 में भी भारी खतरों और धमकियों के बावजूद उन्होंने स्वदेश लौटने का साहस दिखाया था।
तारिक रहमान सरकार पर निशाना, कहा- ‘बदले से नहीं, सुलह से बनेगा भविष्य’
Sheikh Hasina मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए हसीना ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए उनकी और अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ झूठे क्रिमिनल मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश का राजनीतिक भविष्य बदले की भावना पर नहीं, बल्कि आपसी सुलह और लोकतंत्र पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने देश में एक स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की पुरजोर वकालत की।
2024 के विरोध प्रदर्शनों और निष्पक्ष जांच की मांग पर बयान
Sheikh Hasina अगस्त 2024 के घटनाक्रम और प्रदर्शनों पर बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि उनकी सरकार के फैसलों और उसके बाद उपजे हालातों को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन सभी मामलों की जांच पूरी तरह से पारदर्शी, स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, न कि किसी राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित होकर। हसीना ने अंत में कहा कि उनके विरोधियों के अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए क्योंकि वे भी उसी देश के नागरिक हैं।
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