Muzaffarnagar Sadar Election HistoryMuzaffarnagar Sadar Election History
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Muzaffarnagar Sadar Election History:पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक मजबूत गढ़ माना जाता है। पिछले तीन दशकों के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीट पर बीजेपी का दबदबा साफ नजर आता है। हालांकि, समाजवादी पार्टी (SP) यहां मुख्य चुनौती के रूप में उभरी है। साल 1991 से 2022 के बीच हुए 8 विधानसभा चुनावों में से 6 बार बीजेपी ने जीत हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने दो बार इस सीट पर कब्जा जमाया है। बहुजन समाज पार्टी (BSP), कांग्रेस या राष्ट्रीय लोकदल (RLD) जैसी अन्य पार्टियां इस अवधि में यहां अपनी जीत का परचम नहीं लहरा पाई हैं। आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह सीट सभी राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम बन गई है।

1990 के दशक में बीजेपी का एकछत्र राज

Muzaffarnagar Sadar Election History:मुजफ्फरनगर सदर सीट पर 1991 का विधानसभा चुनाव अयोध्या में हुए गोलीकांड के ठीक बाद संपन्न हुआ था। इस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर उतरे सुरेश संगल ने निर्दलीय उम्मीदवार वीरेंद्र को 32,167 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। सुरेश संगल को 67,997 वोट मिले थे।

इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने सुरेश संगल पर ही भरोसा जताया। इस चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था, और सीट शेयरिंग के तहत यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में आई थी। सपा की तरफ से कादिर राणा मैदान में थे। कड़े मुकाबले के बावजूद सुरेश संगल ने 92,400 वोट हासिल कर सपा उम्मीदवार को 27,717 वोटों से हरा दिया।

वर्ष 1996 के चुनाव में बीजेपी ने प्रत्याशी बदलकर सुशीला देवी को मैदान में उतारा। सुशीला देवी ने जनता दल के सोमांश प्रकाश को 7,552 वोटों के अंतर से हराकर सीट पर बीजेपी का कब्जा बरकरार रखा, हालांकि इस बार जीत का अंतर पिछली बार की तुलना में कम रहा था।

सपा ने लगाई सेंध और बीजेपी ने की वापसी

Muzaffarnagar Sadar Election History:वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सदर की राजनीतिक हवा बदली और समाजवादी पार्टी ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की। सपा प्रत्याशी चितरंजन स्वरूप ने त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी के कपिल देव अग्रवाल को 9,123 वोटों से हराया। चितरंजन स्वरूप को 58,932 वोट मिले थे।

हालांकि, 2007 के चुनाव में बीजेपी ने जोरदार वापसी की। बीजेपी प्रत्याशी अशोक कुमार कंसल ने सपा के तत्कालीन विधायक चितरंजन स्वरूप को 11,261 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर अपनी पार्टी का गढ़ वापस छीन लिया।

इसके बाद 2012 के चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की लहर थी। इस चुनाव में सपा के चितरंजन स्वरूप ने बीजेपी के अशोक कंसल को 15,002 वोटों के अंतर से हराते हुए एक बार फिर मुजफ्फरनगर सदर सीट पर सपा का झंडा फहरा दिया।

उपचुनाव और कपिल देव अग्रवाल का दबदबा

Muzaffarnagar Sadar Election History:साल 2015 में चितरंजन स्वरूप के निधन के कारण 2016 में यहां उपचुनाव हुआ। प्रदेश में सपा की सरकार होने के बावजूद बीजेपी के कपिल देव अग्रवाल ने सपा उम्मीदवार गौरव स्वरूप बंसल को 7,352 वोटों से हरा दिया।

इस उपचुनाव के बाद से कपिल देव अग्रवाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा:

  • 2017 चुनाव: कपिल देव अग्रवाल ने सपा के गौरव स्वरूप बंसल को 10,704 वोटों के अंतर से हराया।
  • 2022 चुनाव: सपा और आरएलडी के गठबंधन के तहत यह सीट आरएलडी के खाते में गई थी। आरएलडी उम्मीदवार सौरभ को हराकर कपिल देव अग्रवाल ने 18,694 वोटों के अंतर से शानदार जीत दर्ज की और लगातार तीसरी बार विधायक बने।

2027 के चुनाव के सियासी समीकरण

Muzaffarnagar Sadar Election History:मुजफ्फरनगर सदर सीट के जातिगत और सामाजिक समीकरणों की बात करें तो यहां मुस्लिम, वैश्य, अनुसूचित जाति (SC), सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।

पिछले तीन दशकों के इतिहास से यह स्पष्ट है कि यह सीट मुख्य रूप से बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच की लड़ाई का केंद्र रही है। जहां एक ओर बीजेपी अपने इस मजबूत गढ़ को बचाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी, वहीं समाजवादी पार्टी और उसके गठबंधन के सामने इस गढ़ में बड़ी सेंध लगाने की कठिन चुनौती होगी।

अगला कदम: क्या आप 2027 के इस चुनाव में मुजफ्फरनगर सदर के संभावित उम्मीदवारों या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े राजनीतिक समीकरणों के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?

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