रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
MP Congress Protest : मतदाता सूची पुनरीक्षण और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (पीसीसी चीफ) जीतू पटवारी ने भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दफ्तरों के घेराव के साथ-साथ राज्य सरकार से अन्य पिछड़े वर्ग (OBC) के आरक्षण पर भी जवाब माँगा है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के निष्कासन की मांग और आंदोलन की रूपरेखा
MP Congress Protest जीतू पटवारी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से तत्काल हटाया जाए, पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए और वर्तमान में जारी एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को रोका जाए। इस मांग को लेकर 27 सितंबर को भोपाल स्थित राज्य निर्वाचन आयोग का घेराव किया जाएगा, जबकि 28 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों (कलेक्ट्रेट) पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
राहुल गांधी के दावों का समर्थन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना
MP Congress Protest प्रेस वार्ता के दौरान पीसीसी चीफ ने राहुल गांधी द्वारा पूर्व में उठाए गए मुद्दों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त सत्तारूढ़ दल के दबाव में कार्य कर रहे हैं। पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को बचाने के लिए कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जब तक पारदर्शी व्यवस्था बहाल नहीं होती, आंदोलन थमेगा नहीं।
मध्य प्रदेश में ओबीसी (OBC) आरक्षण और रुकी भर्तियों पर सरकार से जवाब तलब
MP Congress Protest इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पटवारी ने शिक्षा, रोजगार और पिछड़े वर्ग के आरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में लंबे समय से लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को शीघ्र लागू करने की मांग की है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने के बावजूद हजारों ओबीसी अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया से वंचित होकर अपने भविष्य का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से वकीलों की फीस पर हुए भारी खर्च का हिसाब देने और आरक्षण व्यवस्था तुरंत स्पष्ट करने की मांग की।
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