Leopard Skin Smuggling Case Leopard Skin Smuggling Case
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Leopard Skin Smuggling Case:मध्य प्रदेश वन विभाग और स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) के सामने ‘वाइल्डलाइफ SOS’ के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण तेंदुए की खाल की तस्करी से जुड़े मामले में पेश हुए। उत्तर प्रदेश के आगरा में तेंदुए की खाल जब्त होने के बाद इस मामले में उनका नाम सामने आया था, जिसके सिलसिले में उनसे 9 घंटे से अधिक समय तक लंबी पूछताछ की गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई पेशी

Leopard Skin Smuggling Case:यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर के उस आदेश के बाद पूरी हुई, जिसमें अदालत ने कार्तिक सत्यनारायण को वन अधिकारियों के समक्ष पेश होने और जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया था। पूछताछ के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सत्यनारायण ने खुद को और अपने संगठन को पूरी तरह बेगुनाह बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हमेशा से वन विभाग की मदद करना और वन्यजीव तस्करों को पकड़वाने में सहयोग देना रहा है।

एनजीओ कर्मचारी के आरोपों को बताया साजिश या गलतफहमी

Leopard Skin Smuggling Case:कार्तिक सत्यनारायण पर उनके ही एक एनजीओ कर्मचारी द्वारा कुछ गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी बड़ी साजिश, भ्रम या गलतफहमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और पिछले 30-35 वर्षों से उनका जीवन पूरी तरह से वन्यजीव संरक्षण को समर्पित रहा है। वन विभाग को अपना परिवार बताते हुए उन्होंने भविष्य में भी जांच में हरसंभव मदद जारी रखने का आश्वासन दिया।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच

Leopard Skin Smuggling Case:यह पूरा मामला एमपी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा तेंदुए के अवैध शिकार की जांच के दौरान सामने आया, जब गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्धों ने पूछताछ में कथित तौर पर कार्तिक सत्यनारायण का नाम लिया था। हालांकि, सत्यनारायण ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, संबंधित मामलों का निपटारा होने तक कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और सत्यनारायण ने जरूरत पड़ने पर आगे भी जांच में शामिल होने की बात कही है।

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