Iran-US War : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनावपूर्ण शांति अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम (Ceasefire) की अवधि 22 अप्रैल की आधी रात को समाप्त होने वाली है। अब जबकि इस समयसीमा को खत्म होने में मात्र 36 घंटे शेष बचे हैं, वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या युद्ध की आहट के बीच शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा या मध्य-पूर्व एक बार फिर संघर्ष की आग में झुलसेगा।
Iran-US War इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता को ईरान की ‘हरी झंडी’
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक मिशन के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को केंद्र बनाया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि बुधवार को दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल यहाँ आमने-सामने बैठ सकते हैं। हालांकि, अभी तक आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन ईरान का यह कदम सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
Iran-US War ट्रंप का ‘नई डील’ पर दावा और ईरानी नेतृत्व की सख्त प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राजनीति की दखलअंदाजी भी तेज हो गई है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि आगामी समझौता ऐतिहासिक JCPOA (परमाणु समझौता) से कहीं अधिक प्रभावी और सख्त होगा।
दूसरी ओर, ईरान ने अपनी शर्तों को स्पष्ट कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कड़े लहजे में कहा है कि “धमकी और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” ईरान का रुख साफ है कि यदि अमेरिका सार्थक चर्चा चाहता है, तो उसे ‘अधिकतम दबाव’ वाली नीति और प्रतिबंधों की धमकियों को छोड़ना होगा।
Iran-US War अमेरिकी उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और आगामी चुनौतियां
खबरों के अनुसार, अमेरिका की ओर से एक बेहद प्रभावशाली टीम पाकिस्तान पहुँच सकती है। इस टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जारेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। इतने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस समझौते को लेकर गंभीर है।
लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। पहले दौर की चर्चा के बाद भी कई प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। यदि अगले 36 घंटों में कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता है, तो सीजफायर खत्म होते ही क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां फिर से शुरू होने का खतरा है। दुनिया अब सांसें थामकर 22 अप्रैल की आधी रात का इंतजार कर रही है।
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