US-Iran War : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी सेना और ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ताबड़तोड़ ड्रोन व मिसाइल हमले करने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा लगातार की जा रही सैन्य छापेमारी के खिलाफ ‘जवाबी हमला’ है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
US-Iran War जॉर्डन में अमेरिकी ‘थाड’ और ‘पैट्रियट’ रडार सिस्टम नष्ट करने का दावा
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, IRGC ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इस हमले में अमेरिका के अत्याधुनिक THAAD (थाड) मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार, पैट्रियट सिस्टम, C-RAM रडार, ईंधन डिपो और हेलीकॉप्टर मरम्मत केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। जॉर्डन के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए IRGC ने कहा कि वे देश की संप्रभुता का सम्मान करते हैं, लेकिन अमेरिकी अड्डों की मौजूदगी ही क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा है।
US-Iran War कुवैत में ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’: 3 अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन अटैक
ईरानी सेना ने ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के 23वें चरण की घोषणा करते हुए कुवैत में स्थित 3 प्रमुख अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया। सेना के मुताबिक, दोहा बेस, अली अल सलेम एयर बेस और अरिफजान कैंप में बने गोला-बारूद डिपो, फ्यूल टैंक, संचार केंद्र और MQ-9 ड्रोन के हैंगर को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया गया। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसका मकसद कुवैत की क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी बलों को जवाब देना है।
US-Iran War अमेरिका का पलटवार: लगातार 12वीं रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात भी भीषण सैन्य अभियान जारी रखा। सेंटकॉम के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल व ड्रोन स्टोरेज, तटीय निगरानी केंद्रों और वायु रक्षा प्रणालियों पर कई हमले किए हैं। साथ ही, समझौते के टूटने के बाद अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है, जिसके तहत 9 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है। वर्तमान में क्षेत्र में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

