रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Gwalior : आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन जहां एक तरफ दुनिया को करीब ला रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पति-पत्नी के पवित्र रिश्तों में शक और दूरियों की वजह भी बन रहा है। ग्वालियर शहर में मोबाइल फोन का बढ़ता और संदिग्ध इस्तेमाल पारिवारिक कलह की बड़ी वजह बनता जा रहा है। फोन के पासवर्ड, देर रात तक चैटिंग और सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रियता के चलते रिश्तों में अविश्वास इस हद तक बढ़ गया है कि कई जगह बात खून-खराबे और हत्या तक पहुंच चुकी है।
ग्वालियर में मोबाइल विवाद से जुड़े खौफनाक और हिंसक मामले
Gwalior शहर में सामने आए मामलों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक घटना में मोबाइल पर धार्मिक वीडियो देखने जैसी सामान्य बात पर पति ने घर में रखी तलवार से पत्नी पर कातिलाना हमला कर दिया। दूसरे मामले में पत्नी द्वारा ज्यादा समय फोन पर बिताने से रोकने पर मायके पक्ष के लोगों ने पति और उसके परिवार की पिटाई कर दी। वहीं, एक अन्य सनसनीखेज मामले में चरित्र शंका के चलते एसएसबी जवान ने अपनी पत्नी की गला घोंटकर निर्मम हत्या कर दी और उसे हार्ट अटैक का रूप देने की कोशिश की।
महिला थाने में बढ़ते आंकड़े और काउंसलिंग के आंकड़े
Gwalior ग्वालियर के महिला थाने में वैवाहिक विवादों के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। इस साल जनवरी से अक्टूबर के अंत तक लगभग 1493 पारिवारिक विवादों से जुड़े आवेदन थाने पहुंचे हैं। महिला थाने के काउंसलर्स के मुताबिक, रोजाना करीब 5 से 7 मामले ऐसे आ रहे हैं, जिनकी जड़ में मोबाइल का गलत इस्तेमाल या शक होता है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का यह भी मानना है कि सभी विवादों की वजह सिर्फ फोन नहीं है, लेकिन पति-पत्नी के बीच शक की दीवार खड़ा करने में यह अहम भूमिका निभा रहा है।
शक, पासवर्ड और सोशल मीडिया की लत से उजड़ते परिवार
Gwalior काउंसलिंग के दौरान यह बात सामने आई है कि पार्टनर द्वारा फोन पर पासवर्ड लगाना, चैट डिलीट करना और रील्स बनाने को लेकर होने वाली असहमति घरों में क्लेश का कारण बन रही है। एक ही घर में रहने के बावजूद दंपती आपस में बात करने के बजाय घंटों स्क्रीन से चिपके रहते हैं, जिससे संवादहीनता और शक जन्म लेता है। जानकारों की सलाह है कि रिश्तों में पारदर्शिता और आपसी भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि तकनीक के कारण किसी का हंसता-खेलता परिवार न उजड़े।

