Guru PradoshGuru Pradosh
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By: Ravindra Singh

Guru Pradosh : सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। सप्ताह के जिस दिन त्रयोदशी पड़ती है, उसी के आधार पर प्रदोष का नाम रखा जाता है। गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है।

इस बार गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवजी की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि गुरु प्रदोष विशेष रूप से ज्ञान, शिक्षा, धन और पारिवारिक सुख की कामना रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।

शिवलिंग पर अर्पित करें ये 5 चीजें

1. बेलपत्र

Guru Pradosh भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है।

2. पीला चंदन

Guru Pradosh इस दिन शिवलिंग पर पीले चंदन का लेप करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि चंदन अर्पित करने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

3. शहद

Guru Pradosh गुरु प्रदोष की पूजा में शिवलिंग पर शहद अर्पित करने की परंपरा भी बताई गई है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शहद चढ़ाने से व्यक्ति को सौभाग्य और शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।

4. कच्चा दूध

Guru Pradosh शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करना भगवान शिव की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।

5. पंचामृत

Guru Pradosh गुरु प्रदोष पर शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना भी शुभ माना जाता है। पंचामृत सामान्यतः दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से तैयार किया जाता है। इसके बाद शिवजी को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है।

गुरु प्रदोष 2026 पूजा का शुभ समय

Guru Pradosh पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11:16 बजे शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे समाप्त होगी। गुरु प्रदोष की पूजा के लिए शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक का समय बताया गया है।

गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

Guru Pradosh गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इस प्रदोष को गुरु प्रदोष कहा जाता है। इसे बृहस्पति प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष का व्रत करने से ज्ञान, शिक्षा, धर्म, धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं।

ज्योतिषीय मान्यता में बृहस्पति को ज्ञान, गुरु, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और परिवार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों का कारक माना जाता है। इसलिए इन क्षेत्रों में उन्नति की कामना रखने वाले लोग गुरु प्रदोष पर शिव आराधना करते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा

Guru Pradosh पौराणिक कथा के अनुसार एक समय देवराज इंद्र और वृत्रासुर की सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य सेना को काफी हद तक पराजित कर दिया, लेकिन इसके बाद वृत्रासुर स्वयं युद्धभूमि में उतर आया। उसने अपनी मायावी शक्तियों से विशाल और भयावह रूप धारण कर लिया। इससे देवता चिंतित हो गए और उन्होंने देवगुरु बृहस्पति की शरण ली।

बृहस्पति देव ने देवताओं को बताया कि वृत्रासुर कोई साधारण असुर नहीं है। वह पूर्व जन्म में चित्ररथ नाम का राजा था और भगवान शिव का भक्त भी रहा था। उसने गंधमादन पर्वत पर कठोर तपस्या करके महादेव को प्रसन्न किया था।

कथा के अनुसार एक बार चित्ररथ कैलाश पर्वत पहुंचा। वहां उसने भगवान शिव को माता पार्वती के साथ देखा और उनके संबंध को लेकर अनुचित टिप्पणी कर दी। चित्ररथ की बातों से माता पार्वती अत्यंत नाराज हुईं और उन्होंने उसे दैत्य योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया।

माता पार्वती के शाप के कारण चित्ररथ ने दैत्य रूप में जन्म लिया और आगे चलकर वृत्रासुर कहलाया। हालांकि वह बचपन से ही भगवान शिव का भक्त था।

इसके बाद देवगुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र को भगवान शिव की आराधना करने और बृहस्पति प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी। इंद्र ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत किया और महादेव की पूजा की। धार्मिक कथा के अनुसार भगवान शिव की कृपा से इंद्र को वृत्रासुर के विरुद्ध विजय प्राप्त हुई और देवताओं को फिर से शांति मिली।

इसी कारण गुरु प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।

पूजा में रखें श्रद्धा और नियमों का ध्यान

Guru Pradosh गुरु प्रदोष के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शाम के प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग का अभिषेक कर बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के बाद गुरु प्रदोष व्रत की कथा पढ़ना या सुनना शुभ माना जाता है।

धार्मिक अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक आस्था, मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इनके वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया जाता है।

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