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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Durg : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की छावनी पुलिस ने एक बड़े साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ‘म्युल अकाउंट’ (किराए के बैंक खाते) चलाने वाले रैकेट के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी भोले-भले और जरूरतमंद लोगों को आसान किस्तों पर लोन दिलाने का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उनके एटीएम कार्ड व पासबुक अपने कब्जे में ले लेते थे। बाद में इन खातों का सौदा साइबर अपराधियों और सटोरियों से कर दिया जाता था।

Durg बैकुंठ धाम के पास घेराबंदी कर दबोचे गए आरोपी

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि भिलाई के कैंप क्षेत्र में कुछ लोग संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों में शामिल हैं। नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में छावनी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैकुंठ धाम आंगनबाड़ी केंद्र के पास जाल बिछाया। इस घेराबंदी में पुलिस ने दो आरोपियों—आकाश जायसवाल और जावेद अख्तर को रंगे हाथों धर दबोचा। इनके पास से भारी मात्रा में संदिग्ध बैंकिंग दस्तावेज, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

Durg करोड़ों के अवैध ट्रांजैक्शन की आशंका, सट्टे और ठगी का बना जरिया

शुरुआती पूछताछ और जांच में यह बात सामने आई है कि ये आरोपी लोगों से ठगे गए खातों को देश-विदेश में बैठे साइबर ठगों और क्रिकेट सट्टा चलाने वाले बुकीज को बेच देते थे। इन म्युल अकाउंट्स का मुख्य उद्देश्य मुख्य अपराधियों की पहचान छिपाना और अवैध काली कमाई को ठिकाने लगाना होता था। पुलिस को अंदेशा है कि पकड़े गए इन बैंक खातों के जरिए अब तक करोड़ों रुपयों का हेरफेर और संदिग्ध लेनदेन (ट्रांजैक्शन) किया जा चुका है।

Durg बीएनएस (BNS) के तहत केस दर्ज, मास्टरमाइंड की खोज जारी

छावनी पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह केवल छत्तीसगढ़ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) और अन्य फरार सदस्यों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

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