रिपोर्टर: आगस्टीन हेम्बरम
Dumka : जिले के जामा थाना क्षेत्र स्थित गोवारी गांव में मनरेगा सिंचाई कूप निर्माण के दौरान हुई ट्रैक्टर दुर्घटना में चालक टिंकू यादव (उर्फ टिंकू बैध) की मौत के मामले में पुलिसिया कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार में गहरा आक्रोश है। हादसे के दो माह बीत जाने के बाद भी न्याय न मिलने पर मृतक के बुजुर्ग माता-पिता दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
Dumka 15 फीट गहरे कूप में गिरा था ट्रैक्टर, बाल-बाल बचे थे मजदूर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा मनरेगा के तहत निर्माणाधीन सिंचाई कूप से मिट्टी निकालने (अपलिफ्टिंग) के दौरान हुआ था। काम के दौरान ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर लगभग 15 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा, जिससे चालक टिंकू गंभीर रूप से ज़ख्मी हो गया। बाद में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। दुर्घटना के वक्त कूप के भीतर काम कर रहे चार अन्य मजदूर खुशकिस्मती से बाल-बाल बच गए थे।
उच्च अधिकारियों से गुहार, साक्ष्य मिटाने का आरोप
मृतक के पिता शांति यादव ने बताया कि उन्होंने दुमका के पुलिस अधीक्षक (SP), संथाल परगना के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) और जिला कार्यक्रम समन्वयक (मनरेगा)-सह-उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि हादसे के समय पुलिस ने अस्पताल में फर्दबयान तो लिया, लेकिन इसके आधार पर ठोस प्राथमिकी या आपराधिक जांच शुरू नहीं की गई। इसके अलावा, घटनास्थल से दुर्घटनाग्रस्त ट्रैक्टर को भी हटा दिया गया है, जिससे साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।
वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
बेटे की मौत के बाद से ही वृद्ध माता-पिता न्याय की आस में सरकारी दफ़्तरों की परिक्रमा कर रहे हैं, जहां उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। परिजनों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराई जाए, दोषी संवेदकों व अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और मनरेगा योजना से जुड़े अभिलेखों को सुरक्षित रखकर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए।
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