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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Dhar : मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले के बाद यहाँ विशेष हवन-पूजन और ‘महा सत्याग्रह’ का आयोजन किया गया है, जिसमें भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु पहुँचे हैं। साल 2003 के बाद यह पहला मौका है जब बदले हुए नियमों के तहत यहाँ सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। कोर्ट द्वारा भोजशाला को हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद पुरानी नियमावली को पूरी तरह हटाकर नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

Dhar गर्भगृह में स्थापित हुई मां वाग्देवी की प्रतिमा, शहीदों को भी मिला सम्मान

भोजशाला उत्सव समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद पूरे धार क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है। इस विशेष अवसर पर करीब 700 साल बाद पहली बार राजा भोज परिसर के भीतर एक ‘अखंड ज्योति’ प्रज्वलित की गई है। इसके साथ ही, वर्ष 2003 के बाद यह पहली बार हुआ है जब मां वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतीकात्मक प्रतिमा को गर्भगृह में पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित किया गया है। इस आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले तीन शहीदों की तस्वीरें भी पहली बार गर्भगृह में ससम्मान रखी गई हैं।

Dhar 23 साल के ‘सत्याग्रह’ का अगला पड़ाव, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

समिति के महाप्रबंधक हेमंत दौराया ने बताया कि सकल हिंदू समाज साल 2003 से हर मंगलवार को यहाँ शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहा था। कोर्ट के आदेश के बाद आए पहले मंगलवार को इसे ‘महा सत्याग्रह’ का रूप दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ 23 वर्षों का संघर्ष भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर सिद्ध करने के लिए था, वहीं अब इस महा सत्याग्रह का उद्देश्य परिसर के 300 मीटर के दायरे में स्थित अन्य संरचनाओं व अतिक्रमण को कानूनी दायरे में हटाना है।

Dhar ASI ने हटाया पुराना आदेश, अब साल के 365 दिन मिलेगी पूजा की अनुमति

गौरतलब है कि पिछले शनिवार को आए हाईकोर्ट के आदेश में भोजशाला को मां सरस्वती का पावन मंदिर माना गया था। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद हिंदुओं को केवल मंगलवार ही नहीं, बल्कि साल के 365 दिन पूजा-अर्चना करने का अधिकार मिल गया है। अदालत के इस रुख के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने उस पुराने सूचना बोर्ड को भी हटा (पोत) दिया है, जिसमें मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति की बात दर्ज थी। फिलहाल इस बड़े बदलाव को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।

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