रिपोर्टर: गनेश सिंह
Delhi : केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ ऊर्जा और बायोफ्यूल (जैव ईंधन) को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। E20 पेट्रोल के बाद अब सरकार ने E100 (100% इथेनॉल ईंधन) से चलने वाले वाहनों के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में आवश्यक संशोधन कर दिए हैं। इस नए बदलाव के तहत E85 के साथ-साथ E100 ईंधन को भी आधिकारिक उत्सर्जन मानकों में शामिल कर लिया गया है। इस फैसले के बाद वाहन निर्माता कंपनियों के लिए E100 आधारित फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के परीक्षण और प्रमाणन का रास्ता साफ हो गया है।
क्या आपकी पुरानी पेट्रोल कार E100 ईंधन से चल सकेगी?
Delhi यदि आपके पास सामान्य पेट्रोल या E20 ईंधन के लिए डिज़ाइन की गई पुरानी कार है, तो आप उसमें E100 का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इथेनॉल और सामान्य पेट्रोल के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं; अधिक इथेनॉल वाला ईंधन सामान्य फ्यूल इंजन, रबर पाइप और फ्यूल पंप को नुकसान पहुंचा सकता है। E100 पर गाड़ी चलाने के लिए उसके इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम और सामग्री को विशेष रूप से मॉडिफाई और प्रमाणित किया जाना अनिवार्य है। मौजूदा कार मालिकों को परेशान होने या तुरंत गाड़ी बदलने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार ने इसे पुरानी कारों के लिए अनिवार्य नहीं किया है।
E20, E85 और E100 ईंधन में मुख्य अंतर
Delhi इन तीनों ही ईंधनों में सबसे बड़ा अंतर इथेनॉल और पेट्रोल के अनुपात का होता है:
| ईंधन श्रेणी | इथेनॉल की मात्रा | पेट्रोल की मात्रा | उपयोग |
| E20 | 20% | 80% | मौजूदा अधिकांश नई BS6 पेट्रोल कारों के लिए |
| E85 | 85% तक | 15% (लगभग) | विशेष फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) गाड़ियों में |
| E100 | लगभग 100% | शून्य (शुद्ध जैव ईंधन) | विशेष रूप से डिज़ाइन की गई E100 फ्लेक्स-फ्यूल कारों में |
कार के माइलेज, कीमत और पर्यावरण पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
Delhi इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Energy Density) सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इस कारण, E100 ईंधन पर चलने वाली कारों का प्रति लीटर माइलेज सामान्य पेट्रोल कारों से कम हो सकता है। हालांकि, कुल बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि E100 ईंधन की प्रति लीटर बाजार कीमत पेट्रोल से कितनी सस्ती रखी जाती है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से, गन्ने और मक्के जैसी फसलों से निर्मित इथेनॉल एक रिनेवेबल बायोफ्यूल है, जिससे हानिकारक उत्सर्जन घटेंगे और कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

