Kota Mid-Day Meal Grain Embezzlement:राजस्थान के कोटा जिले में स्कूली बच्चों के पोषाहार (मिड-डे मील) योजना के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी गोदामों से उठाया गया हजारों क्विंटल गेहूं और चावल कभी बच्चों तक पहुँचा ही नहीं, बल्कि रास्ते में ही गायब कर दिया गया। इस मामले में विभागीय जांच के बाद गुजरात की एक ठेकेदार फर्म की बड़ी लापरवाही और गबन सामने आया है। रसद विभाग की औपचारिक शिकायत पर कोटा के नयापुरा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे खुला राज?
Kota Mid-Day Meal Grain Embezzlement:राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत चालू वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के लिए खाद्यान्न का आवंटन किया गया था। नियमों के अनुसार, कोटा के सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच गेहूं और चावल का शत-प्रतिशत उठाव कर लिया गया था।
अनाज के परिवहन का जिम्मा गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज फर्म को सौंपा गया था, जिसे 32 रुपए 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से वर्क ऑर्डर दिया गया था। हालांकि, कुछ ही दिनों में कोटा के विभिन्न सरकारी स्कूलों से पोषाहार कम मिलने की शिकायतें मिलने लगीं, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने ब्लॉक-वार सत्यापन शुरू किया और इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ।
लाखों का खाद्यान्न रास्ते से ही गायब
Kota Mid-Day Meal Grain Embezzlement:विभाग द्वारा कराई गई ब्लॉक-वार जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि:
- 1,844 क्विंटल गेहूं और 1,369 क्विंटल चावल तयशुदा स्कूलों तक कभी पहुँचे ही नहीं।
- इस तरह कुल 3,213 क्विंटल से अधिक का राशन गायब पाया गया।
- सरकारी मूल्य के आधार पर इस गबन की कीमत करीब 81 लाख रुपए आंकी गई है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 1 करोड़ से 1.10 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है।
नोटिस का जवाब न देने पर सख्त कानूनी कार्रवाई
Kota Mid-Day Meal Grain Embezzlement:घोटाले की पुष्टि होने के बाद, रसद विभाग ने ठेकेदार फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक (निवासी हिम्मतनगर, गुजरात) और उसके अधिकृत सहयोगी शैलेंद्र शर्मा (निवासी बरूंधन, तालेड़ा) को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 15 अक्टूबर की सुबह तक स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन आरोपियों की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
कोटा के जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) रूप सिंह मीणा ने मीडिया को बताया कि सभी सीबीईओ (CBEOS) से मंगाई गई रिपोर्ट में गोदाम से हुए उठाव और स्कूलों में हुई वास्तविक सप्लाई के बीच भारी अंतर पाया गया। इसके आधार पर प्रशासन ने आगे की कानूनी कार्रवाई और पुलिस जांच तेज कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

