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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Datia : राजपरिवार की करोड़ों की विवादित विरासत को लेकर चल रहे कानूनी संघर्ष में ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई तक दतिया और सेंवढ़ा स्थित ऐतिहासिक किलों सहित राजपरिवार से जुड़ी सभी पैतृक संपत्तियों के क्रय-विक्रय और हस्तांतरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

7 साल पुराने बंटवारे का विवाद और निचली अदालत का फैसला

Datia यह पूरा कानूनी विवाद लगभग सात वर्ष पुराना है। राजपरिवार की ऐतिहासिक संपत्तियों के मालिकाना हक और बंटवारे को लेकर 14 नवंबर 2019 को एक दीवानी मुकदमा दायर किया गया था। इस दौरान संपत्तियों की संभावित बिक्री को रोकने के लिए 23 जून 2022 को अंतरिम स्टे की याचिका लगाई गई थी। हालांकि, मार्च 2026 में दतिया की जिला अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट की अपील और रजिस्ट्री व ट्रांसफर पर पाबंदी

Datia निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हेमंत सिंह और गिरिराज सिंह ने अप्रैल 2026 में ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष को ध्यान में रखते हुए विवादित संपत्तियों के ट्रांसफर पर स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। इस आदेश के प्रभावी होने से अब अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक इन बहुमूल्य संपत्तियों की न तो रजिस्ट्री हो सकेगी और न ही कोई नया हस्तांतरण।

दतिया से लेकर ग्वालियर तक फैली संपत्तियों पर अंतिम निर्णय का इंतजार

Datia राजपरिवार के इस बड़े विवाद का दायरा सिर्फ दतिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ग्वालियर में स्थित कई कीमती संपत्तियां और ऐतिहासिक पैतृक किले के दावे भी शामिल हैं। हाईकोर्ट द्वारा बिक्री पर लगाई गई इस रोक को मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिहाज से बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सभी पक्षों की नजरें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मालिकाना हक से जुड़े तथ्यों की स्थिति और स्पष्ट होगी।

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