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रिपोर्टर: विजय गुप्‍ता

Datia : मध्य प्रदेश के दतिया पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर अपने बयानों से ध्यान खींचा है। बुधवार को विश्वप्रसिद्ध मां पीतांबरा पीठ में दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में सनातन और हिंदुत्व को किसी बाहरी समुदाय से उतना जोखिम नहीं है, जितना कि अपनों से ही है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म और आस्था से निरंतर जुड़े रहने की अपील भी की।

मां पीतांबरा पीठ में की विशेष पूजा, पूर्व गृहमंत्री ने किया भव्य स्वागत

Datia दतिया पहुंचने पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री सबसे पहले मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निवास ‘माई कृपा’ पहुंचे, जहां समर्थकों और श्रद्धालुओं ने पुष्पमाला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया। इसके पश्चात बाबा बागेश्वर ने मां पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी देवी के दर्शन कर विशेष अनुष्ठान किया तथा पीठ परिसर में स्थापित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी किया। दतिया दर्शन के बाद वे शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित अपनी हनुमान कथा के अंतिम दिन में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।

‘प्रतिमा ही नहीं, प्रति माह भी करें दर्शन’ — श्रद्धालुओं को दिया संदेश

Datia पीतांबरा पीठ की पवित्र तपोभूमि की सराहना करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस पावन स्थल से उनका गहरा आध्यात्मिक लगाव है। उन्होंने श्रद्धालुओं को एक खास संदेश देते हुए कहा, “लोग केवल प्रतिमा (मूर्ति) के दर्शन करते हैं, लेकिन हमारा कहना है कि प्रतिमा के साथ-साथ प्रति माह भी मंदिर आकर दर्शन करने का नियम बनाएं।” सनातन को लेकर उन्होंने आगे कहा कि जगाने का काम करने वालों को अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन समाज को जागरूक करने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।

पंडोखर सरकार के आरोपों पर साधी चुप्पी

Datia संवाददाताओं द्वारा जब पंडोखर धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज द्वारा हाल ही में लगाए गए आरोपों के संबंध में सवाल पूछा गया, तो बागेश्वर बाबा ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। उन्होंने किसी भी विवाद में पड़ने से इनकार करते हुए कहा कि वे संतों पर किसी भी प्रकार की टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहते। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से दोनों पीठों के बीच जुबानी तकरार की खबरें सामने आ रही थीं, लेकिन धीरेंद्र शास्त्री ने इस विषय पर संयमित रुख अपनाया।

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