₹661 crore government fund scam₹661 crore government fund scam
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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

₹661 crore government fund scam : हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के सरकारी फंड में हुए 661 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कड़ा रुख अपना लिया है। सीबीआई की टीमों ने 6 जून को दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़ और पंचकूला स्थित 6 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई ‘आईडीएफसी फर्स्ट बैंक’ (IDFC First Bank) और ‘एयू फाइनेंस बैंक’ (AU Finance Bank) के जरिए सरकारी धन की हेराफेरी और गबन से जुड़ी है।

₹661 crore government fund scam बड़े नौकरशाहों पर कड़ा एक्शन, रडार पर आए कई अफसर

हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (प्रॉसिक्यूशन क्लियरेन्स) दिए जाने के तुरंत बाद सीबीआई ने यह एक्शन लिया है। जांच एजेंसी ने 3 आईएएस (IAS) और 1 आईएफएस (IFS) अधिकारी के परिसरों पर रेड की। इनमें मोहम्मद शायिन, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार (तीनों आईएएस) और नवनीत कुमार (आईएफएस) शामिल हैं।

इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर सरकारी खजाने के पैसों को गलत तरीके से दूसरे खातों में ट्रांसफर (डायवर्ट) किया। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने 5 अन्य आईएएस अफसरों के खिलाफ भी जांच की मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

₹661 crore government fund scam 10 सरकारी विभागों के बजट में हुई हेराफेरी

सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस महाघोटाले की आंच हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों (चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट चंडीगढ़) तक फैली हुई है। इसके अलावा, इस खेल में ‘विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड’ (Vipam Consultancy Pvt. Ltd.) नाम की कंपनी और उसके निदेशक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

जांच का मुख्य बिंदु: सीबीआई को शक है कि घोटाले की मोटी रकम पहले इस निजी कंपनी के खातों में भेजी गई और बाद में उसे डायरेक्टर के पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बदले संबंधित सरकारी अधिकारियों को अनुचित लाभ (रिश्वत) पहुंचाया गया।

₹661 crore government fund scam छापेमारी में मिले अहम सबूत; जल्द दाखिल होगी सप्लीमेंट्री चार्जशीट

शनिवार को हुई इस तलाशी के दौरान सीबीआई ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और बेनामी संपत्तियों के कागजात जब्त किए हैं। यह पूरा मामला हरियाणा विजिलेंस (ACB) और चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज केसों से जुड़ा है, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था।

सीबीआई पंचकूला की विशेष अदालत में पहले ही एक मुख्य चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें ‘हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड’ और ‘हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद’ के अफसरों की मिलीभगत का खुलासा किया गया था। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि बाकी बचे आरोपियों के खिलाफ भी जल्द ही एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में पेश की जाएगी।

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