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Report by: Ravindra Singh

Bhopal : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सोमवार को ‘जन-आक्रोश’ की गवाह बनी, जब हजारों की संख्या में महिलाएं अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस विशाल ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ का नेतृत्व किया और विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नारी शक्ति अपना अपमान कभी नहीं भूलती और जिन लोगों ने महिला आरक्षण के मार्ग में रोड़े अटकाए हैं, उन्हें आने वाले समय में जनता ही सबक सिखाएगी।

Bhopal कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर तीखा प्रहार: ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा कहां गया?

संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि “प्रियंका गांधी कहती थीं कि मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं, लेकिन जब बहनों के अधिकार देने की बात आई, तो कांग्रेस ने उनके हक का गला घोंट दिया।” मुख्यमंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की यह परंपरा पुरानी है; जिस तरह तीन तलाक के मुद्दे पर बहनों के साथ अन्याय हुआ, वैसा ही व्यवहार आज भी किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आधी आबादी की इच्छा को कुचलने वालों को बहनें कभी माफ नहीं करेंगी।

Bhopal महापुरुषों का उदाहरण और मातृसत्ता का गौरव

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति में नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी परंपरा सदैव मातृसत्ता की रही है। उन्होंने कहा कि बिना ‘सीता’ के राम और बिना ‘राधा’ के कन्हैया का आशीर्वाद अधूरा है। डॉ. यादव ने राजा राम मोहन राय, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों का स्मरण करते हुए बताया कि नारी समानता की लड़ाई सदियों पुरानी है और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे निर्णायक मोड़ पर लाया गया है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार बहनों के हर निर्णय के साथ है और जल्द ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के इस कृत्य के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

Bhopal अक्षय तृतीया पर ‘संग्राम’ का शंखनाद: घर-घर तक पहुंचेगी आक्रोश की ज्वाला

इस रैली में न केवल राजनीतिक गर्जना हुई, बल्कि सांस्कृतिक चेतना भी दिखाई दी। विख्यात गायिका अंबिका जैन अंबर ने मंच से महिलाओं को जागरूक किया, वहीं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बहनों का बुनियादी अधिकार था। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर निकली इस पदयात्रा में महिलाएं हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर चल रही थीं। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने आह्वान किया कि यह आक्रोश केवल सड़कों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर घर तक पहुँचना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी दल महिलाओं की उम्मीदों को कुचलने का साहस न कर सके।

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